एक तरफ कृषि कानून को लेकर सरकार और किसानों में ठनी हुई है तो दूसरी तरफ कृषि कानून के खिलाफ कानून बनाने वाले राजस्थान सरकार की सबसे बड़ी जयपुर के कुकर खेड़ा मंडी में किसानों का हाल जाना तो पता चला कि किसान मंडी व्यवस्था से भी खुश नहीं है और वह चाहता है कि नए कानून के तहत अगर खेत पर पूरा दाम मिल जाए तो इससे अच्छा कुछ भी नहीं है. मगर अफसोस की बात है कि बहुत कम किसान जानते हैं कि नया कृषि कानून क्या है.
जब मंडी में किसानों के मूंगफली के खरीदने और बेचने के तौर तरीके देखा तो पता चला कि किसान बहुत ज्यादा खुश नहीं है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नए कृषि कानून का विरोध कर रहे हैं मगर उनके गृह जिले जोधपुर से किसान 350 किलोमीटर दूर से मूंगफली लेकर जयपुर में बेचने आए हैं और वहां पर भी ऑक्शन हुआ मगर इन्हें दाम नहीं मिला.
इनका कहना है कि मूंगफली का दाम कम से कम 60 रुपये किलो होना चाहिए जबकि मंडी में 47 से 48 रुपये ही भाव मिल रहे हैं. ऐसे में लागत तो छोड़िए पूरा घाटा होगा. सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं रही है और जो व्यापारी जोधपुर में खेत पर खरीदने जा रहे हैं वह पैसे देते नहीं हैं, ऐसे में पिछले तीन-चार दिनों से ट्रक में माल लेकर 4-5 व्यापारी इस मंडी में बैठे हुए हैं. इस इंतजार में कि कब ऑक्शन में उन्हें 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भाव मिलेगा.
किसान माणक राम कह रहे हैं कि जोधपुर के ओसियां में 10 बीघे में मूंगफली की फसल लगाई थी और प्रति बीघा के हिसाब से 5000 रुपए उपजाने में खर्च हुआ है. पर यहां पर तीन-चार दिनों से कोरोना का जोखिम लेते हुए बैठे हुए हैं पर भाव नहीं मिल पा रहा है. अगर सरकार नए बिल में ऐसा कोई नियम बना दे कि खेत पर ही पूरे दाम मिले तो हमारे लिए तो वह बिल अच्छा है. दूसरे किसान हैं सुखराम जो नए कृषि बिल के बारे में कुछ नहीं जानते हैं. वह कहते हैं कि हम तो जोधपुर से फसल लेकर जयपुर आए हैं मगर दाम नहीं मिल रहा है. अगर सरकार ऐसा कोई कानून बनाती है इसमें खेत परिधान मिल जाए तो अच्छा है.