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राजस्थानः जिला प्रमुख चुनावों में BJP ने जीती हारी बाजी, प्रधान के चुनाव में कांग्रेस आगे

पांच जिलों में कांग्रेस के पास बहुमत था. इसके बावजूद बीजेपी ने अंतिम समय में बाजी पलट दी और राजधानी जयपुर सहित तीन जिलों में जिला प्रमुख के पद पर कब्जा कर लिया.

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बीजेपी ने पलट दी बाजी
बीजेपी ने पलट दी बाजी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जिला प्रमुख की तीन-तीन सीटों पर विजयी रहे बीजेपी-कांग्रेस
  • कांग्रेस के टिकट पर जीते 78 में से 50 प्रधान, बीजेपी के 25 

राजस्थान के जिला प्रमुख चुनाव में विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ा उलटफेर करते हुए छह में से तीन जिलों में जीत दर्ज की. पांच जिलों में कांग्रेस के पास बहुमत था. इसके बावजूद बीजेपी ने अंतिम समय में बाजी पलट दी और राजधानी जयपुर सहित तीन जिलों में जिला प्रमुख के पद पर कब्जा कर लिया. बीजेपी ने कांग्रेस के दो उम्मीदवारों को तोड़ते हुए एक वोट से जयपुर जिला प्रमुख के पद पर विजय हासिल कर ली.

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जिला प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस ने जोधपुर दौसा और सवाई माधोपुर की सीट पर कब्जा किया है तो वहीं बीजेपी जयपुर, सिरोही और भरतपुर में अपना जिला प्रमुख बनाने में कामयाब रही है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के विधानसभा क्षेत्र आमेर और जालसू में भाजपा अपना प्रधान बनाने में कामयाब रही है.

जिला प्रमुख चुनाव की बात करें तो छह में से पांच जिलों में कांग्रेस के पास बहुमत था इसके बावजूद बीजेपी ने बड़ा उलटफेर करते हुए तीन सीटों पर कब्जा कर लिया. जिला प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस ने जोधपुर, दौसा और सवाई माधोपुर सीट पर कब्जा कर सकी.

जयपुर में ऐसे जीती बीजेपी

कांग्रेस के टिकट पर जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीतकर आई रमा देवी चोपड़ा सोमवार की सुबह बीजेपी में शामिल हुईं और बीजेपी के समर्थन से चुनाव जीत गईं. जयपुर में बहुमत होते हुए भी कांग्रेस जिला प्रमुख की सीट गंवा बैठी. रमा देवी को 26 वोट मिले जबकि बीजेपी के पास केवल 24 जिला परिषद सदस्यों का समर्थन था. बीजेपी ने रमा देवी सहित कांग्रेस के 2 सदस्यों को तोड़कर अपने पाले में कर हारी बाजी पलट दी. रमा ने कांग्रेस की उम्मीदवार सरोज देवी शर्मा को हराया. सरोज को 24 वोट मिले. जयपुर जिला परिषद में कुल 51 सदस्य हैं.

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जोधपुर में जीतीं लीला मदेरणा

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे परसराम मदेरणा की पुत्रवधू लीला मदेरणा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने में सफल रहीं. कांग्रेस में भारी खींचतान के बीच लीला मदेरणा को 21 वोट मिले जबकि बीजेपी की चंपा देवी को 16 वोट ही मिले.

भरतपुर से बीजेपी के जगत जीते

भरतपुर से पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह के बेटे जगत सिंह बीजेपी के टिकट पर जिला प्रमुख का चुनाव जीत गए. जगत सिंह को 28 वोट मिले, जबकि बीजेपी के 17 सदस्य ही जीते थे. जगत सिंह ने कांग्रेस के खेमे में भी सेंध लगाई और निर्दलीयों के भी वोट प्राप्त किए. बीजेपी के 17 वोट में 11 अतिरिक्त वोट का इजाफा कर जगत चुनावी नैया पार लगाने में सफल रहे. 37 सदस्यीय जिला परिषद में जीत के लिए 19 वोट ही चाहिए थे लेकिन जगत को बहुमत के लिए जरूरी वोट से 9 अधिक मिले. कांग्रेस की हलीमा को नौ वोट ही मिले जबकि पार्टी के 14 सदस्य चुनाव जीतकर आए थे.

दौसा से कांग्रेस के हीरालाल जीते

दौसा जिला प्रमुख के पद पर हीरालाल सैनी विजयी रहे. हीरालाल सैनी ने बीजेपी की उम्मीदवार नीलम गुर्जर को हराया. हीरालाल सैनी को 16 और नीलम को 13 वोट मिले. दौसा जिला परिषद में 29 सदस्य हैं, जीतने के लिए 15 सदस्यों के वोट चाहिए थे. कांग्रेस उम्मीदवार हीरालाल सैनी को 16 वोट मिले जबकि कांग्रेस के 17 सदस्य जीते थे. कांग्रेस के एक सदस्य ने क्रॉस वोटिंग की. बीजेपी के आठ सदस्य जीते थे लेकिन उसकी उम्मीदवार को पांच वोट ज्यादा मिले.

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सिरोही में बीजेपी के अर्जुन की जीत

सिरोही में बीजेपी उम्मीदवार अर्जुन पुरोहित चुनाव जीत गए हैं. अर्जुन पुरोहित को 18 वोट मिले जबकि कांग्रेस के हरीश चौधरी को तीन वोट मिले. सिरोही जिला परिषद में 21 सदस्य हैं. बीजेपी के 17 और कांग्रेस के चार सदस्य जीतकर जिला परिषद पहुंचे थे. कांग्रेस के भी एक सदस्य ने अर्जुन पुरोहित के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की. सिरोही में बीजेपी उम्मीदवार की एकतरफा जीत तय थी.

सुदामा देवी बनीं सवाई माधोपुर की जिला प्रमुख

सवाई माधोपुर में सुदामा देवी को 25 में से 17 वोट मिले जबकि बीजेपी उम्मीदवार को महज आठ वोट मिले. सूबे की सत्ता पर काबिज कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी को जिला प्रमुख पद के चुनाव में तीन-तीन सीटें मिलीं. गौरतलब है कि इन छह जिलों में कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर 99 और बीजेपी के सिंबल पर 90 जिला परिषद सदस्य निर्वाचित होकर आए थे. 10 निर्दलीय भी जिला परिषद सदस्य का चुनाव जीते थे.

प्रधान के 78 में से 50 पदों पर जीती कांग्रेस

प्रधान के कुल 78 में से 50 पदों पर कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी रहे. वहीं विपक्षी बीजेपी के उम्मीदवार महज 25 सीटों पर ही जीत सके. भरतपुर जिले में 12 में से 10 प्रधान कांग्रेस के हैं. एक कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार भी प्रधान पद पर विजयी रहा. दौसा में कांग्रेस के 11 में से 10 उम्मीदवार प्रधान का चुनाव जीतने में सफल रहे. इसी तरह जयपुर के 22 में से 13, जोधपुर के 21 में से 12, सवाई माधोपुर के सात में से तीन, सिरोही के पांच में से एक उम्मीदवार प्रधान पद पर विजयी रहे. कांग्रेस के नौ उम्मीदवार निर्विरोध प्रधान चुने गए जबकि बीजेपी के 25 में से 10 प्रधान महज एक वोट से चुनाव जीते हैं. बता दें कि साल 2015 के चुनाव में 78 में से 32 प्रधान बीजेपी के थे जबकि कांग्रेस के 24 प्रधान चुनाव जीते थे.

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