scorecardresearch
 

राजस्थान में पिछले 12 सालों में दो बार लाया गया लव जिहाद विधेयक, अब तक नहीं मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लव जिहाद को लेकर विधायक पर सियासी बवाल मचा हुआ है मगर राजस्थान में पिछले 12 सालों से दो बार इस तरह का विधेयक बनाकर राष्ट्रपति को मंजूरी के लिए भेजा गया है मगर अभी भी राष्ट्रपति के पास यह विधेयक मंजूरी के लिए लंबित है. 

Advertisement
X
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राजस्थान में पिछले 12 सालों से दूसरा इस तरह का विधेयक
  • राष्ट्रपति के पास यह विधेयक मंजूरी के लिए लंबित
  • 2006 में पहली बार बीजेपी की वसुंधरा सरकार लेकर आई थी विधेयक

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लव जिहाद को लेकर विधायक पर सियासी बवाल मचा हुआ है मगर राजस्थान में पिछले 12 सालों से दो बार इस तरह का विधेयक बनाकर राष्ट्रपति को मंजूरी के लिए भेजा गया है मगर अभी भी राष्ट्रपति के पास यह विधेयक मंजूरी के लिए लंबित है. 

Advertisement

बता दें कि राजस्थान में 2006 में पहली बार बीजेपी की वसुंधरा सरकार ने जबरन या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन करवाने के खिलाफ विधेयक पारित करवाया था मगर उस वक्त केंद्र में यूपीए की सरकार थी और राष्ट्रपति भवन ने कुछ संशोधन का सुझाव देकर लौटा दिया था.

देखें आजतक LIVE TV

उस वक्त कांग्रेस ने विधानसभा में जबरदस्त इस बिल का विरोध किया था. उस वक्त राज्यपाल प्रतिभा पाटिल थीं. मगर दोबारा बीजेपी ने विधानसभा में 2008 में कांग्रेस के भारी विरोध के बावजूद राजस्थान धर्म स्वतंत्रता विधेयक पारित कर राज्यपाल को भेजा मगर राज्यपाल एस.के.सिंह ने इस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था. बाद में लगातार तीन बार इस विधेयक को राजभवन भेजने के बाद राज्यपाल ने इसे मंजूरी दी और तब इसे राष्ट्रपति भवन भेजा गया. 

Advertisement

उस वक्त राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल थीं जिन्होंने इस विधेयक पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. बीजेपी के केंद्र की सत्ता में आए 6 साल से ज्यादा वक्त हो गए हैं मगर अभी तक राष्ट्रपति भवन से राजस्थान का धर्म स्वतंत्रता विधायक हस्ताक्षर होकर वापस नहीं आया है और न हीं बीजेपी ने राज्य में इसकी मांग की है. 

अब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में इस तरह के कानून बनने के बाद बीजेपी के पूर्व कानून मंत्री ने कहा है कि राष्ट्रपति भवन से तुरंत इस संशोधन प्रस्ताव के साथ विधेयक को मंजूर करवाया जाएगा मगर मौजूदा कानून मंत्री शांति धारीवाल कह रहे हैं कि 12 साल पुराने विधेयक को मंजूरी अगर मिल भी जाती है तो सरकार की नीति के अनुसार उस पर विचार किया जाएगा.

 

Advertisement
Advertisement