राजस्थान की वसुंधरा सरकार अब बीजेपी के पीएम उम्मीद्वार और गुजरात के मुख्यमंत्री की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कर बच्चों को पढ़ाएगी. राज्य के शिक्षा मंत्री ने इसके लिए अधिकारियों की एक टीम बनाई है जो नरेन्द्र मोदी के जीवन पर पाठ तैयार करेंगे. अगले शिक्षा सत्र में तीसरी से छठी कक्षा के छात्रों को राज्य सरकार के सरकारी स्कूलों में मोदी की जीवनी पढ़ाई जाएगी. कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि मोदी का जीवन पढ़ बच्चे नफरत सीखेंगे.
राजस्थान के स्कूली बच्चों को अब तक स्वतंत्रता सेनानियों और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्रियों के जीवन के बारे में पढ़ाया जाता रहा है लेकिन ये पहली बार हो रहा है कि एक प्रधानमंत्री पद के घोषित उम्मीद्वार और दूसरे राज्य के जीवित मुख्यमंत्री को स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है. नरेन्द्र मोदी के जीवन को राजस्थान सरकार ने तीसरी से लेकर छठी कक्षा तक के छात्रों को सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का फैसला किया है. पाठ्यक्रम अगले सत्र में शामिल किया जाएगा और इससे पहले इसके लिए अधिकारियों की एक टीम बनी है जो पाठ तैयार करेंगे. सरकार का कहना है कि इससे राजस्थान के छात्रों को संघर्ष के लिए हौसला मिलेगा.
राजस्थान के शिक्षा मंत्री कालीचरण सर्राफ का कहना है कि उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है और काफी मेहनत कर इस मुकाम पर पहुंचे हैं तो हमारे मन में विचार आया कि क्यों ना इसे पाठ्यक्रम में शामिल कर नरेन्द्र मोदी के जीवन के बारे में बच्चों को पढ़ाया जाए.
हालांकि राजस्थान सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. कांग्रेस ने इसे चाटुकारिता की पराकाष्ठा बताते हुए कहा है कि नरेन्द्र मोदी की जीवनी पढ़ कर बच्चे नफरत से भर जाएंगे. राजस्थान कांग्रेस की प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए कहा, ‘ये चाटुकारिता की पराकाष्ठा है. ये तो अभी प्रधानमंत्री बने ही नहीं और दिवास्वपन देख रहे हैं. यहां तो उनको शामिल किया जाता है जिनका अध्याय समाप्त हो गया हो. और फिर मोदी का काला अध्याय है, तो बच्चों को क्या नफरत सिखाएंगे.’ लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बच्चों को सीख देने के लिए नरेन्द्र मोदी ही क्यों?
बीजेपी का कहना है कि नेहरू और इंदिरा जब पाठ्यक्रम का हिस्सा बन सकते हैं तो मोदी क्यों नहीं. साफ है इस पर विवाद होगा. राजस्थान में अगले साल फरवरी तक राजनीतिक रूप से अहम शहरी निकायों और पंचायतों के चुनाव होने हैं जिसमें मोदी का नाम विवादों के जरिए ही सही काम आएगा.