राष्ट्रीय महिला आयोग की टीम शनिवार को राजस्थान के दौरे पर गई. महिला आयोग की सदस्य श्यामला कुंदर और राजुलबेन देसाई जयपुर पहुंचीं. राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा है कि राज्य में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं.
महिला आयोग के राजस्थान दौरे पर सियासत शुरू हो गई है. राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य राजुलबेन देसाई ने कहा कि हम प्रेस कॉन्फ्रेंस करना चाहते थे लेकिन जिला प्रशासन की ओर से कहा गया है कि जिले में कोरोना संक्रमण की वजह से धारा 144 लागू है, मगर सच्चाई ये है कि राजस्थान सरकार के मंत्री धरने पर बैठे हैं.
महिला आयोग की टीम ने महिला बाल विकास विभाग के सचिव डॉ. के के पाठक से रिपोर्ट ली और राज्य में महिला अपराध की स्थिति का जायजा लिया. महिला आयोग की सदस्य राजुलबेन देसाई ने कहा कि उन्होंने महिला और बाल विकास विभाग के अफसरों से मुलाकात की और राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराध पर चिंता व्यक्त की. इसके अलावा ऐसे अपराधों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने क्या कदम उठाए हैं इस पर भी चर्चा की गई.
महिला आयोग की टीम ने डीजीपी ऑफिस में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और पुलिस अधिकारियों द्वारा महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सख्ती न बरतने पर चिंता जताई. महिला आयोग ने कहा कि राज्य के पुलिस अधिकारी महिला आयोग को कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने में आनाकानी करते हैं.
बता दें कि राजस्थान के बारां में दो नाबालिग बच्चियों से रेप की घटनाओं से राज्य में सनसनी मच गई थी. बच्चियों के अनुसार पड़ोस के रहने वाले दो लड़के उन्हें भगा ले गए थे और जयपुर में बस स्टैंड रोड पर आधी रात को बलात्कार किया था. हालांकि बाद में पीड़ितों ने मजिस्ट्रेट के सामने इस तरह किसी भी घटना होने से इनकार किया था पर अब दोबारा से लड़कियों के पिता ने आरोप लगाया है कि बच्चियों पर दबाव डाला गया था और माता पिता को मार डालने की धमकी दी गई थी जिसकी वजह से मजिस्ट्रेट के सामने उन्होंने बयान बदला था.
इस घटना पर राजस्थान में खूब राजनीतिक हंगामा हुआ. जयपुर गई महिला आयोग की टीम ने कहा कि राजस्थान में संवैधानिक मूल्यों का हनन हो रहा है और महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए बहुत डरावनी और भयानक तस्वीर राजस्थान से सामने आई है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने कहा कि दलित अत्याचार में भी राजस्थान नंबर वन पर है और यहां पर बेटियां सुरक्षित नहीं हैं.