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राजस्थान के जालौर में पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी परिवार का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें त्रिलोकचंद राणा नामक पाकिस्तानी हिन्दू अपने छोटे-छोटे बच्चे और पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने की बात कर रहा है. दावा किया जा रहा है कि उसे इलाके में परेशान किया जा रहा है.
पाकिस्तान से आया हिंदू परिवार क्यों परेशान?
त्रिलोकचंद राणा ने वीडियो में कहा है कि वह जालौर जिले के सांचौर के धानता गांव में रह रहे हैं. लेकिन अब जिस रिश्तेदार ने उन्हें बुलाया था, वहीं परेशान करने लगा है. साथ ही गांव वाले भी उन्हें गांव से भगाने पर तुले रहते हैं, उनके साथ मारपीट की गई है.
उन्होंने वीडियो के जरिए अधिकारियों से अपील की है कि उन्हें या तो पाकिस्तान वापस भेज दें या फिर उनकी सहायता की जाए. ऐसा ना होने पर आत्महत्या की चेतावनी दी गई है. परिवार की तरफ से जोर देकर कहा गया है कि हम पाकिस्तान से यहां सब कुछ लेकर आए लेकिन यहां के लोग हमें सुकून से रहने नही दे रहे.
पाकिस्तानी मीडिया ने लगाया मिर्च-मसाला
इस वीडियो के सोशल मीडिया में वायरल होते ही हिंदुस्तान से पाकिस्तान तक हड़कंप मच गया. पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के सांघर इलाके में रहने वाले त्रिलोकचंद के मात -पिता ने भी दोनों देश की सरकारों से गुहार लगाई कि उनके बच्चों को राजस्थान में परेशान किया जा रहा है और उन्हें पाकिस्तान वापस भेज दिया जाए. पाकिस्तानी मीडिया ने इस मुद्दे को मिर्च-मसाला लगा दिखाने की पूरी कोशिश की और तथ्यों को तोड़ मरोड़कर दिखाया गया.
जांच में क्या सामने आया?
वीडियो वायरल होने के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो हरकत में आई और जालौर जिले के धानता गांव पहुंच मामले की जांच की. जांच में पता चला कि त्रिलोकचंद अपने पूरे परिवार जिनमें लगभग 12 सदस्य हैं के साथ लगभग 4 साल पहले यहां आया था. वो अपने रिश्तेदार के कहने पर गया था और वहीं अवैध तरीके से बस गया. अब इस केस का दूसरा एंगल ये है कि इन लोगों पर लगातार झगड़ा करने का आरोप लगाया गया है. गांव वालों ने स्थानीय प्रशासन को भी इसकी शिकायत की थी.
उस मामले में कार्रवाई करते हुए सांचौर पुलिस ने त्रिलोकचंद और उसके परिवार को कुछ महीने पहले जगह खाली करने का एक नोटिस दे दिया था. उस नोटिस में बताया गया कि 'जालौर जिले के तीन पुलिस थाना क्षेत्र जिसमें सांचौर, सरवाना एवं चितलवाना थाना आते हैं, वहां पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार दंड (संशोधन) अधिनयम 1961 की धारा 3 (1 ) दिनांक 12. 03. 1996 को प्रकाशित अधिसूचना के अंतर्गत विदेशी नागरिकों एवं पाक नागरिकों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया हुआ है और इस इलाके में किसी विदेशी और पाकिस्तान के लोगों का स्थाई निवास पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है. इसलिए आप उक्त क्षेत्र को छोड़कर कोई अन्य जगह पर स्थाई निवास एवं पंजीकरण करने का आवेदन दे.'
लेकिन फिर 2 अगस्त 2021 को इस केस में फिर नाटकीय मोड़ तब आया जब गांव वालों ने फिर त्रिलोकचंद के खिलाफ शिकायत की. कहा गया कि ये लोग झगड़ा तो करते ही हैं, इसके अलावा उनकी गतिविधियों पर भी शक है. इसके बाद फिर पुलिस आई और त्रिलोकचंद को हिरासत में लेकर थाने चली गई और उसे अगले दिन छोड़ दिया गया. अब पुलिस की उसी कार्रवाई से नाराज होकर पाकिस्तानी हिन्दू त्रिलोकचंद ने पूरे परिवार के साथ एक वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया.
पीड़ित ने क्या कहा है?
इस मामले पर जब आजतक ने त्रिलोकचंद से बात की तो वो आज भी वायरल वीडियो में बताई गई बातों को दोहराया और कहा कि "हम यहां सालों से रह रहे हैं, हम पाकिस्तान छोड़ यहां रहना चाहते हैं. लेकिन गांव वाले हमें परेशान कर रहे हैं, हमारे रिश्तेदार भी परेशान कर रहे हैं और अब हमें पुलिसवालों ने भी 5 दिन के अंदर गांव छोड़ने का नोटिस दे दिया है. त्रिलोकचंद ने ये भी कहा कि हम काफी परेशान हैं और इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक सुखराम विश्नोई से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बात नहीं हो पा रही है.
पुलिस की क्या दलील?
इस मामले पर आजतक ने जालौर जिले के सांचौर थाना अधिकारी प्रवीण कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि "सांचौर क्षेत्र के धानता गांव में पाक विस्थापित एक परिवार के कई लोग निवास कर रहे हैं, 2 दिन पूर्व कोई झगड़ा हुआ था जिसमें त्रिलोकचंद के द्वारा गांव के एक परिवार के साथ धक्का-मुक्की की गई थी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शांति भंग के आरोप में त्रिलोकचंद को गिरफ्तार कर थाने ले गई. जहां तक इस परिवार को कहीं निकालने या हटाने की बात है तो इसमें कोई सत्यता नहीं है.
जानकारी के लिए बता दें कि जालौर जिले में तीन पुलिस थाना क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक विदेशी नागरिकों व पाक नागरिकों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया हुआ है.
जब इस मामले को लेकर जालौर की कलेक्टर नम्रता वर्षिनी से बात की तो उन्होंने वायरल वीडियो को लेकर बताया कि जो पाक विस्थापित परिवार वहां निवासरत है, वो क्षेत्र वर्जित है. ये लोग पाकिस्तान से धार्मिक वीजा पर भारत आए थे, जो की 30 दिन के लिए ही वैध होता है.