जयपुर में 'श्री राजपूत करणी सेना' की हुंकार रैली फुस्स साबित हुई है. करणी सेना ने विधानसभा चुनाव से पहले राजपूतों की ताकत को दिखाने के लिए जयपुर के विद्याधर नगर में अपनी रैली बुलाई थी.
विद्याधर नगर स्टेडियम में बड़ा मंच बनाया गया था और करीब 40,000 कुर्सियां लगाई गई थीं. रैली 11 बजे शुरू होनी थी लेकिन दोपहर 2 बजे के बाद भी 200 लोग इकट्ठा नहीं हो पाए. आखिरकार खाली कुर्सियों को संबोधित कर ही नेता चलते बने.
भीड़ नहीं आने पर करणी सेना के संयोजक लोकेंद्र सिंह कालवी ने कहा कि आज करवा चौथ की वजह से एक भी महिला घर से बाहर नहीं आ पाई जबकि पुरुष भी न जाने क्यों नहीं आए हैं. इस बात की हम जांच करेंगे कि आखिर क्या हुआ कि लोग नहीं आए. हर जगह लोगों ने खुद कहा था आने के लिए और बसें भिजवाई गई थीं लेकिन अगर लोग नहीं आए हैं तो उन कारणों का पता करेंगे और 14 नवंबर को दोबारा रैली कर भीड़ दिखाकर अपनी ताकत दिखाएंगे.
माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कालवी ने करणी सेना की रैली टिकटों की सौदेबाजी के लिए की थी और यह बात राजपूतों में फैल गई कि करणी सेना कांग्रेस और बीजेपी से सौदेबाजी कर सकती है. लिहाजा राजपूतों ने करणी सेना की रैली से दूरी बनाई.
कालवी ने कहा कि हर जगह गुटबाजी होती है मगर हम इसको ठीक करेंगे. हालांकि, इशारों-इशारों में कालवी ने अपनी मंशा जाहिर कर दी कि उनका झुकाव बीजेपी की तरफ है. करणी सेना के संयोजक ने कहा कि कांग्रेस 12-14 राजपूतों को टिकट देती है जबकि बीजेपी 25 राजपूतों को टिकट देती है. ऐसे में अगर कांग्रेस चाहती है कि राजपूत उसकी तरफ आएं तो कम से कम बीजेपी जितनी टिकट तो दें.
करणी सेना पद्मावती फिल्म का विरोध करके सुर्खियों में आई थी, तब सामाजिक संगठन के तौर पर राजपूत इन के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े थे और इसी वजह से करणी सेना अपने आप को बड़ा समझने लगी. हालांकि, करणी सेना का एक दूसरा धड़ा भी है जिसका नाम श्री राष्ट्रीय करणी सेना है. राष्ट्रीय करणी सेना ने भी आज कोटपूतली में रैली कर राजपूत समाज के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों से अपना पक्ष साफ करने के लिए कहा. राष्ट्रीय करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेडी ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों से राजपूतों की भलाई के लिए रोड मैप मांगा है और इसके बाद ही राजपूतों के वोट के लिए समर्थन देने की बात कही है.