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लॉकडाउन से रमजान में सूनी पड़ीं अजमेर शरीफ की गलियां, कई जायरीन फंसे

सबको पता है कि कोरोना संक्रमण का खतरा कितना बड़ा है, इसीलिए अजमेर शरीफ की दरगाह में अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई है, वहीं सीढ़ियों को छूने की भी मनाही है.

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अजमेर शरीफ में सन्नाटा (Photo- Aajtak)
अजमेर शरीफ में सन्नाटा (Photo- Aajtak)

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  • लॉकडाउन के कारण अजमेर शरीफ की दरगाह पर भी पसरा सन्नाटा
  • दरगाह में अंदर जाने की इजाजत नहीं, सीढ़ियों को छूने से भी मनाही

लॉकडाउन के चलते ना सिर्फ बाजार, कारोबार बंद हैं बल्कि पवित्र तीर्थ स्थानों पर भी सन्नाटा पसरा है. पवित्र रमजान के महीने में मुस्लिम श्रद्धालुओं के लिए विश्व विख्यात अजमेर शरीफ की दरगाह पर भी सन्नाटे की चादर फैली है. गलियों में ना कोई हलचल है, ना सड़कों पर कोई चहल-पहल. कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए अजमेर शरीफ के कई इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है. बाजार बंद है, दुकानें बंद हैं, जिस दुकान का नाम रौनक है उसके नीचे सन्नाटा है.

दरगाह के दरवाजे तो खुले हैं लेकिन किसी को भी अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है. व्यवस्था से जुड़े लोग अंदर ही रहते हैं, लेकिन बाहर से कोई ना भीतर जा सकता है ना ही उसे सीढ़ियों को छूकर इबादत करने की इजाजत है. सामने से गुजरता हुआ अगर कोई सजदा करने के लिए सीढ़ियों को छूता है, तो दरगाह शरीफ के रक्षक और खादिम ऐसा करने से मना करते हैं.

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सबको पता है कि संक्रमण का खतरा कितना बड़ा है, इसीलिए इबादत से पहले एहतियात बरता जा रहा है. खादिम बिलाल चिश्ती ने बताया, 'कई बार लोग जाने-अनजाने दरगाह शरीफ की सीढ़ियों को छूकर सजदा करते हैं, लेकिन हम उन्हें ऐसा करने से मना करते हैं, ताकि संक्रमण का खतरा ना हो.'

हर साल लगभग 8 लाख तीर्थयात्री रमजान महीने में अजमेर शरीफ की दरगाह दुआ मांगने आते हैं. कई जायरीन तो रमजान का महीना शुरू होने के पहले ही अजमेर शरीफ पहुंच जाते हैं और रमजान के महीने की आखिरी नमाज अदा कर ही घर वापस लौटते हैं. इस बार भी लोग दरगाह शरीफ आए, लेकिन लॉकडाउन की घोषणा हो गई और हजारों की तादाद में जायरीन अजमेर शरीफ में ही फंसे रह गए.

400-500 जायरीन फंसे हुए हैं

दरगाह कमेटी के मुताबिक, अभी भी 400 से 500 जायरीन जो बाहर से आए थे वे इलाके में फंसे हुए हैं. इलाके के पुलिस प्रभारी हेमराज का कहना है, 'फिलहाल लगभग 500 लोग यहां पर हैं. कुछ जायरीन समय पर सही डाटा ना देने की वजह से अटक गए हैं. कर्नाटक, केरल, झारखंड और महाराष्ट्र के लगभग 500 जायरीन अटके हुए हैं. बड़ी संख्या में जायरीन को वापस भेजा जा चुका है. जो लोग अटके हैं उनको प्रशासन और दरगाह शरीफ की ओर से मदद की जा रही है.'

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मोहम्मद ताहिर केरल के निवासी हैं और 22 मार्च को ही अजमेर शरीफ पहुंच गए थे. लॉकडाउन की घोषणा हो गई और तब से वहीं फंस गए. जेब में पैसा खत्म हो गया है, मोबाइल फोन चोरी हो गया है और अब अपने घर वापस जाना चाहते हैं. जब भी पुलिस की टीम दरगाह शरीफ के पास से गुजरती है ताहिर मदद मांगने पहुंच जाते हैं.

राशन खत्म, किसी तरह जी रहा हूं

ताहिर कहते हैं, 'फोन ना होने की वजह से अपने घरवालों को संपर्क नहीं कर पा रहा हूं. हर दिन मैं लोगों से मदद मांग रहा हूं. यहां कर्नाटक के कुछ जायरीन भी हैं उनके साथ मैंने रजिस्टर किया है और सोचा कि जब उन्हें वापस ले जाया जाएगा, तो मैं कर्नाटक तक पहुंच जाऊंगा. उसके बाद अपने गांव चला जाऊंगा. राशन खत्म हो गया है किसी तरह से जी रहा हूं.'

केरल के ताहिर की तरह ही कानपुर के रहने वाले अंसार अली भी अपनी पत्नी और बच्चे के साथ अजमेर शरीफ में ही फंस गए. उर्स देखने आए थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद कानपुर वापस नहीं जा पाए. हर दिन सुबह दरगाह शरीफ पर मदद की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन वापस चले जाते हैं. अंसार का कहना है कि हम पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए रजिस्ट्रेशन के बारे में नहीं पता.

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जेब में पैसे नहीं है तो क्या करें

इरफान की पत्नी राशन की किल्लत से परेशान हैं, क्योंकि मदद करने वाला भी कोई नहीं. फरीदा गुहार लगा रही है कि जल्दी से जल्दी उन्हें कानपुर जाने की व्यवस्था कर दी जाए. फरीदा का कहना है, 'घर में मम्मी की तबीयत खराब है, राशन किसी ने दे दिया तो दे दिया, जब खत्म हो जाता है तो लोग कहते हैं कहां से लाएं. हमें कहा कि सरकार से अपील करिए और वापस जाइए, लेकिन हम कहां जाएं. पता चला है कि यहां से गाड़ियां गई हैं तो हम पता करने आते हैं कि कैसे वापस जाएं. यहां रह कर क्या करेंगे, क्या खाएंगे-पिएंगे. एक बस कानपुर भी गई है, लेकिन हमें पता नहीं चला. अब जेब में पैसे नहीं है तो क्या करें.'

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मुश्किल में फंसे इन जायरीनों को दरगाह शरीफ प्रशासन की ओर से भी मदद की जा रही है. खादिम बिलाल चिश्ती जो हर मुमकिन मदद कर रहे हैं. दरगाह कमेटी, अंजुमन और अजमेर शरीफ जिला प्रशासन की ओर से मदद के बारे में जानकारी देते हुए दरगाह के खादिम सैयद बिलाल चिश्ती कहते हैं, 'हम चाहते हैं कि लॉकडाउन का पालन करते हुए लोग घरों में रहे, घरों से ही इबादत करें, सेहरी का सामान हम घरों में पहुंचा रहे हैं.'

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उर्स के दौरान अजमेर शरीफ में 15 लाख श्रद्धालु दरबार शरीफ में दुआ मांग चुके थे. हर साल रमजान महीने में लगभग 7 से 8 लाख लोग सजदा करने आते हैं. खादिम कहते हैं कि लोग प्रशासन की बात मान रहे हैं और लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं.

जहां लोग फंसे, वो रेड जोन का इलाका

दरगाह शरीफ इलाके के इंचार्ज हेमराज ने आजतक से बातचीत में बताया, 'जहां भी कुछ लोग फंसे थे वह रेड जोन इलाका है और इनको वापस भेजना भी खतरे से कम नहीं है, लेकिन इनकी स्क्रीनिंग की गई, मेडिकल चेकअप करके तब लोगों को भेजा जा रहा है, प्रयास लगातार जारी है और उम्मीद की जा रही है कि जल्दी सब लोगों को वापस भेजा जा सकेगा.'

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दरगाह शरीफ के आसपास पूरे अजमेर शरीफ शहर में कई हॉटस्पॉट बने हुए हैं. उन इलाकों में कर्फ्यू भी जारी है. पुलिस जगह-जगह पर बैरिकेडिंग लगाई हुई है. वायरस के संक्रमण से अब तक अजमेर में पांच लोगों की मौत हो चुकी है. पूरे शहर में अब तक 231 पॉजिटिव केस मौजूद हैं. 80 लोग इस संक्रमण से बाहर भी आ चुके हैं. फिलहाल खतरा टला नहीं है, इसीलिए रमजान के पाक महीने में भी श्रद्धालु घर में ही इबादत कर रहे हैं और हिंदुस्तान समेत पूरी दुनिया की सलामती के लिए दुआ मांग रहे हैं.

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