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राजस्थान: सहकारी समिति चुनाव लड़ने के लिए जरूरी नहीं साक्षर होना, गहलोत सरकार ने बदला नियम

वसुंधरा सरकार ने जब को-ऑपरेटिव सोसायटी का चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य किया था, तब कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए इसका कड़ा विरोध किया था. वसुंधरा सरकार के इस फैसले पर तब जमकर हंगामा हुआ था. सहकारिता मंत्री उदयलाल अंजना का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थाओं में एक बड़ा तबक़ा है जो इस नियम के चलते अधिकारों से वंचित रह रहा था जिसकी वजह से हम इसे ख़त्म कर रहे हैं.

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राजस्थान में को-ओपरेटिव चुनाव लड़ने लिए जरूरी नहीं साक्षर होना (फाइल फोटो)
राजस्थान में को-ओपरेटिव चुनाव लड़ने लिए जरूरी नहीं साक्षर होना (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पहले अनिवार्य था कम से कम पांचवी पास होना
  • राज्य में करीब 35,000 को-ऑपरेटिव सोसायटी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य में को-ऑपरेटिव सोसायटी के चुनाव लड़ने के लिए साक्षर होने की बाध्यता खत्म करने का निर्णय लिया है. इस तरह मौजूदा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार के इस फैसले को पलट दिया है.

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वसुंधरा सरकार ने जब को-ऑपरेटिव सोसायटी का चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता को अनिवार्य किया था, तब कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए इसका कड़ा विरोध किया था. वसुंधरा सरकार के इस फैसले पर तब जमकर हंगामा हुआ था. सहकारिता मंत्री उदयलाल अंजना का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थाओं में एक बड़ा तबक़ा है जो इस नियम के चलते अधिकारों से वंचित रह रहा था जिसकी वजह से हम इसे ख़त्म कर रहे हैं.

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बना था देश का पहला राज्य
वसुंधरा राजे सरकार ने ‘राजस्थान सहकारी सोसायटी संशोधन अधिनियम-2016’ लागू किया था. इस तरह को-ऑपरेटिव का चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया था. तब की सरकार की दलील थी कि यदि पढ़े-लिखे किसान होंगे तो विकास कार्यक्रम बेहतर बनाएंगे और अधिकारी भ्रष्टाचार नहीं कर पाएंगे .

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कितना पढ़ा होना था जरूरी
पहले डेयरी और बुनकर संघों और महिला सहकारी संस्थाओं के चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम पांचवी पास होना जरूरी था. इसी तरह कृषि से संबंधित सहकारी समितियों के लिए कम से कम आठवीं पास की होने की शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य था. अशोक गहलोत सरकार ने इस न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पारित कर विधि विभाग को भेज दिया है.

राजस्थान में 35,000 से अधिक को-ऑपरेटिव सोसायटी
राजस्थान में करीब 35,000 से ज्यादा को-ओपरेटिव सोसायटी हैं. इनके एक करोड़ से ज़्यादा सदस्य हैं और तीन हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन इन सहकारी संस्थाओं के ज़रिए होता है.

 

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