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राजस्थान: पटाखों पर रोक के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे दुकानदार, कल सुनवाई

याचिका में कहा गया है कि पूरे पर्यावरण में जितना भी प्रदूषण है, उसमें पटाखों का प्रदूषण 4% ही  है बाकी 96% प्रदूषण कारों से सिगरेट से, कारखानों से और कंस्ट्रक्शन से होता है.

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राजस्थान सरकार ने पटाखे जलाने और बिक्री पर रोक लगाई है.
राजस्थान सरकार ने पटाखे जलाने और बिक्री पर रोक लगाई है.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • दुकानदारों ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
  • मंगलवार को याचिका पर सुनवाई
  • सरकार ने लगाया था पटाखों पर बैन

राजस्थान में दिवाली पर पटाखों की बिक्री और पटाखे जलाने पर पाबंदी के खिलाफ दुकानदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखाया है. सूबे की कांग्रेस सरकार के आदेश के लिए खिलाफ दुकानदारों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका पर सुनवाई कल यानी मंगलवार को होनी है.

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दायर की गई याचिका में कहा गया है कि पूरे पर्यावरण में जितना भी प्रदूषण होता है, उसमें पटाखों से होने वाला प्रदूषण महज चार फीसदी ही होता है. बाकी 96 फीसदी प्रदूषण कार, सिगरेट, कारखानों से और कंस्ट्रक्शन (निर्माण कार्य) से होता है. इसके अलावा याचिका में यह भी कहा गया है कि भारत के किसी भी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने पटाखों से कोरोना मरीजों को ज्यादा तकलीफ होने जैसी कोई बात नहीं कही है. ऐसे में यह रोक नहीं लगनी चाहिए.

उधर, बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने कहा है कि प्रदूषण रोकने के लिए ईद पर बकरों की कुर्बानी पर भी पाबंदी लगनी चाहिए, क्योंकि उससे भी प्रदूषण फैलता है. बीजेपी विधायक अशोक लाहोटी ने दिवाली पर पटाखे पर रोक पर अशोक गहलोत को हिंदू विरोधी बताया है और कहा कि ये हिंदुओं पर जजिया टैक्स लगाने जैसा है.

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कांग्रेस ने अपने आदेश का बचाव करते हुए कहा है कि या तो लोग जिंदगी बचा लें या पटाखा जला लें. राजस्थान सरकार के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा है कि लोगों का जीवन बचाने के लिए सरकार ने पटाखों पर पाबंदी लगाई है क्योंकि पटाखे के धुएं से कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के फेफड़े में इंफेक्शन बढ़ जाएगा.

 

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