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राजस्थान: 2013 में विधानसभा पहुंचे थे ये राजघराने, क्या होगी वापसी?

राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 7 दिसंबर को मतदान होना है. जबकि नतीजे 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे.

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राजकुमारी दीया कुमारी (फोटो-royaljaipur.in)
राजकुमारी दीया कुमारी (फोटो-royaljaipur.in)

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देश में प्रजातंत्र से पहले राजतंत्र था, जहां विरासत में रियासत मिलना सुनिश्चित था. प्रजातंत्र में यह व्यवस्था नहीं होती है और सत्ता के लिए प्रजा की परमिशन जरूरी होती है. राजस्थान में भी कई राजघरानों ने राजनीति में प्रवेश की कोशिश की, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया.

वहीं, 2013 के विधानसभा चुनाव में राजघरानों के कुछ ऐसे वारिस भी रहे जिन्हें जीत नसीब हुई. आइए जानते हैं वो कौन राजकुमार या राजकुमारी हैं जिन पर पिछले चुनाव जनता ने भरोसा किया और विधानसभा तक पहुंचाया.

कृष्णेंद्र कौर (नदबई)- भरतपुर के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली कृष्णेंद्र कौर का बड़ा राजनीतिक कद माना जाता है. वह फिलहाल वसुंधरा राजे कैबिनेट में पर्यटन मंत्री भी हैं. उन्होंने 2013, 2008 और 2003 में जीत दर्ज की थी. कौर पहले भरतपुर लोकसभा से सांसद थीं. कृष्णेंद्र कौर डीग राजपरिवार से संबंध रखती हैं.

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दीयाकुमारी (सवाईमाधोपुर)- राजकुमारी दीयाकुमारी जयपुर राजघराने की राजकुमारी हैं और जयपुर के महाराजा सवाई भवानी सिंह और महारानी पद्मिनी देवी की पुत्री हैं. अपनी दादी राजमाता गायत्री देवी के कदमों का अनुसरण करते हुए राजकुमारी दीयाकुमारी ने भी राजनीति में प्रवेश किया था. उन्होंने बीजेपी के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ा और वो सवाईमाधोपुर से विधायक हैं.

सिद्धिकुमारी (बीकानेर पूर्व)- सिद्धिकुमारी लालगढ़ पैलेस में संग्रहालय की निदेशक हैं और बीकानेर के तत्कालीन साम्राज्य और महाराजा श्री करणी सिंह बहादुर के पुत्र नरेंद्र सिंह बहादुर की बेटी हैं. इससे पहले भी वो विधायक रह चुकी हैं. अभी वो बीकानर पूर्व से विधायक हैं.

वसुंधरा राजे (झालरापाटन)- वसुंधरा राजे को दो बार राज्य की मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला. उन्होंने झालावाड़ लोकसभा सीट से सर्वाधिक पांच बार चुनावों में जीत दर्ज की है. अभी वो झालरापाटन से विधायक हैं. वसुंधरा मध्यप्रदेश के सिंधिया राजघराने की बेटी हैं और उनकी शादी धौलपुर राजघराने में हुई थी.

विश्वेंद्र सिंह डीग (डीग)- भरतपुर लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद रह चुके हैं. फिलहाल डीग विधानसभा से कांग्रेस के विधायक हैं. राजस्थान के भरतपुर के पास डीग से विधायक विश्वेंद्र भरतपुर राजघराने से हैं. उनके पिता महाराज बिजेंद्र सिंह भरतपुर के आखिरी राजा थे. वे 1962 से 1971 तक लोकसभा के सदस्य भी रहे. विश्वेंद्र सिंह ने 2013 राजस्थान असेंबली इलेक्शन में अपनी संपत्ति कुल 118 करोड़ दिखाई थी.

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रणधीर सिंह भींडर (वल्लभनगर)- रणधीर सिंह भींडर उदयपुर के भींडर राजघराने के सदस्य हैं और अभी वल्लभनगर से निर्दलीय विधायक हैं. माना जा रहा है कि इस बार वो बीजेपी में वापसी कर सकते हैं.

गजेंद्र सिंह खींवसर (लोहावट)- वसुंधरा सरकार में वन और पर्यावरण मंत्री हैं. वे तीन बार से चुनाव जीतते आ रहे हैं. इससे पहले वे खींवसर से चुनाव जीत चुके हैं.

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