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राजस्थान: कल आएंगे उपचुनाव के नतीजे, गहलोत-पायलट में कौन पड़ेगा भारी

पिछला चुनाव बीजेपी यहां ढाई हजार मतों से जीती थी, ऐसे में 3 फीसदी मतदान कम होने पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों उम्मीदवारों में बेचैनी है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

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  • मंडावा सीट पर पिछली बार से 3 फीसदी कम हुआ मतदान
  • मतदान कम होने पर कांग्रेस और BJP दोनों पक्षों में बेचैनी

राजस्थान में खींवसर और मंडावा विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे कल यानी 24 अक्टूबर को आएंगे. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच का यह मैच एक-एक की बराबरी पर रहेगा. वहीं दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि मंडावा में कांग्रेस उम्मीदवार रीटा चौधरी की जीत तय मानी जा रही है तो खींवसर में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार नारायण बेनीवाल जीत सकते हैं.

किसका पक्ष पड़ेगा भारी?

बताया जा रहा है कि सभी पार्टियों के अंदर एक बेचैनी है क्योंकि मंडावा सीट पर जहां पिछली बार से 3 फीसदी मतदान कम हुआ है. वहीं खींवसर सीट पर 13 फीसदी मतदान कम हुआ है. मंडावा सीट पर रीटा चौधरी करीब ढाई हजार मतों से बीजेपी के उम्मीदवार नरेंद्र खिचड़ से हार गई थी.

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नरेंद्र खिचड़ बाद में बीजेपी के टिकट पर लोकसभा के सांसद बन गए तो उनकी जगह बीजेपी ने कांग्रेस नेता सुशीला सिंगड़ा को बीजेपी के टिकट पर मैदान में उतारा है. कहा जा रहा है कि मंडावा में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के अंदर ही जमकर भितरघात हुआ है. कांग्रेस का मजबूत ओला परिवार रामनारायण चौधरी की बेटी रीटा चौधरी के पक्ष में नहीं था तो दूसरी तरफ बीजेपी के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस से आई उम्मीदवार के साथ नहीं लग पाए.

ढाई हजार मतों से जीती थी बीजेपी

पिछला चुनाव बीजेपी यहां ढाई हजार मतों से जीती थी. ऐसे में 3 फीसदी मतदान कम होने पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों उम्मीदवारों में बेचैनी है. हालांकि सबकी निगाहें हनुमान बेनीवाल की परंपरागत सीट खींवसर पर लगी हुईं हैं. यहां से हनुमान बेनीवाल के नागौर से सांसद बनने के बाद उनके छोटे भाई नारायण बेनीवाल बीजेपी के समर्थन से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

माना जाता है कि हनुमान बेनीवाल इलाके के लोकप्रिय नेता हैं मगर 13 फीसदी मतदान कम होने से हनुमान के खेमे में ही बेचैनी है. कांग्रेस की मानें तो वहां हार या जीत का फैसला हजार दो हजार वोटों के बीच ही रहेगा. क्योंकि मिर्धा परिवार पूरी तरह से एकजुट होकर कांग्रेस के उम्मीदवार हरेंद्र मिर्धा के साथ चुनाव में उतरा था और हरेंद्र मिर्धा अपने आखिरी चुनाव जैसे भावनात्मक मुद्दों पर वोट मांग रहे थे.

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मतदान के नतीजों का इंतजार

हनुमान बेनीवाल करीब 15,000 वोटों से जीते थे. दूसरे स्थान पर कांग्रेसी और तीसरे स्थान पर बीजेपी थी. इस बार यहां पर बीजेपी चुनाव नहीं लड़ रही है. हनुमान बेनीवाल की पार्टी को समर्थन दे रही है. कांग्रेस के लोगों का मानना है कि कम मतदान हनुमान बेनीवाल के समर्थकों के घर से बाहर नहीं निकलने की वजह से हुआ है. साथ ही वसुंधरा राजे का बीजेपी का खेमा हनुमान बेनीवाल के साथ नहीं था.

यह चुनाव मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए भी एक बड़ी चुनौती है क्योंकि विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन लोकसभा चुनाव में 25 की 25 सीटें हार गए. उसके बाद हो रहे चुनाव में गहलोत के कामकाज और लोकप्रियता का भी आंकलन किया जाएगा.

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