कृषि कानून के कारण भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को शिरोमणि अकाली दल के रूप में एक पुराने साथी को खोना पड़ा है. इस विवादित कानून पर मोदी सरकार को अपनों का ही साथ नहीं मिल रहा है. एनडीए का हिस्सा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा है अगर कृषि कानून में कोई खामी दिखी तो हम भी इसका विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे.
हनुमान बेनीवाल ने कहा है कि हम इस कानून का विशेषज्ञों से अध्ययन करा रहे हैं. अगर ये किसानों के हित में नहीं रहा तो इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करूंगा. जरूरत पड़ी तो हम किसानों के साथ खड़े मिलेंगे. हनुमान बेनीवाल ने कहा कि कृषि कानून को लेकर अलग-अलग राय आ रही है, जिसके पूरे अध्ययन की जरूरत है. अगर इसमें कोई खामी दिखी तो हम इसका विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे.
किसानों की पार्टी कही जाने वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के रुख को लेकर राजस्थान में लंबे समय से सवाल पूछे जा रहे थे, क्योंकि यह एनडीए का घटक दल है.
गहलोत सरकार को घेरा
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान के आदिवासी जिलों में उपद्रव एक साजिश का नतीजा है. गहलोत सरकार अगर यह मान रही है कि यहां पर दूसरे राज्यों से आकर लोगों ने उपद्रव फैलाया है तो इसकी जांच एनआईए से करानी चाहिए. हनुमान बेनीवाल ने कहा कि सरकार बचाने को लेकर अशोक गहलोत ने भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायकों के दबाव में कानून-व्यवस्था की अनदेखी की है.
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि आदिवासी समाज के छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया. निजी लोगों के वाहनों में आग लगा दी गई. इसकी पूरी जांच होनी चाहिए. हनुमान बेनीवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत डरे हुए हैं, जिसकी वजह से उन्होंने सिविल लाइंस सड़क पर मीडिया की आवाजाही बंद करवा दी है. अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे दोनों की पोल खुल गई है.
वसुंधरा राजे पर निशाना साधते हुए हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान की पूर्व सीएम ने इस बार अशोक गहलोत को सरकार बचाने में मदद की है और बदले में दोनों मिलकर यहां पर राज कर रहे हैं. मगर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी दोनों की दाल गलने नहीं देगी और तीसरी ताकत के रूप में हम मैदान में जल्दी उतरने वाले हैं. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी को मजबूत करने के लिए अगर जरूरत पड़ी तो हम एनडीए से अलग हो जाएंगे. 2023 के चुनाव में राजस्थान में किसान ही मुख्यमंत्री बनेगा.