राजस्थान में अब पायलट समर्थकों का सब्र जवाब देने लगा है. कांग्रेस में सचिन पायलट का कुछ होता दिख नहीं रहा है, इसलिए भी समर्थक अब हताश होने लगे हैं. राजस्थान सरकार के मंत्री भजनलाल जाटव मंगलवार को अपने क्षेत्र जसपुरा मोरोली (भरतपुर) में एक कॉलेज का उद्घाटन करने जा रहे थे. लेकिन बीच राह में ही विरोध शुरू हो गया.
किसी तरह बचते बचाते, मंत्री गांव पहुंच गए. मगर विरोधी इतने ज़्यादा थे कि इसके बाद मंत्री जी को आनन-फानन में कॉलेज से भी भागना पड़ा. इतनी सुरक्षा के बीच प्रदेश के मंत्री भजनलाल जाटव को मुर्दाबाद भी सुनना पड़ा.
कांग्रेस नेता ही कर रहे थे विरोध
दरअसल भजनलाल जाटव पायलट गुट के विधायक थे और सचिन पायलट ने टिकट दिलवाया था. कहा जाता है कि पायलट के कहने पर ही इनको मंत्री बनाया गया था. मगर जब सचिन पायलट और अशोक गहलोत का विवाद हुआ तो भजनलाल जाटव ने पाला बदलते हुए अशोक गहलोत के गुट का दामन थाम लिया था.
राजस्थान में फिर जुलाई जैसे हालात!
कहा जा रहा है कि बहुत जल्द ही राजस्थान में एक बार फिर से पिछली बार की जुलाई वाले हालात होने जा रहे हैं क्योंकि सचिन पायलट गुट के बहुत सारे विधायक अब बग़ावत के मूड में हैं. आलाकमान के साथ हुए समझौते में उन्हें आज तक कुछ नहीं मिला है. सचिन पायलट के मान सम्मान के लिए जो कमेटी गठित की गई थी वहां भी अहमद पटेल के मृत्यु के बाद कामकाज बंद है. अब पायलट बोर्ड के विधायकों का सब्र टूटने लगा है. सचिन पायलट के ख़ामोश हो जाने से भी पायलट के विधायक पायलट से खफ़ा हैं.
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बढ़ रही विधायकों की नाराजगी
राजस्थान की अशोक गलहोत सरकार के खिलाफ पार्टी विधायकों की नाराजगी बढ़ती जा रही है. इससे पहले भी कांग्रेस के आठ विधायकों ने अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ असंतोष व्यक्त करते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था. हाल ही में राजस्थान विधानसभा में 50 विधायकों को बिना माइक वाली सीट दिए जाने का मुद्दा गर्माया था. इससे पहले इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी तथा कांग्रेस विधायक रमेश मीणा के बीच बहस हुई थी.
रमेश मीणा ने विधानसभा के बाहर कहा था कि मैं अपनी समस्याओं के बारे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलूंगा. राहुल गांधी से मिलने का समय भी मांगा है. लेकिन अगर वहां भी हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो मैं इस्तीफा देने से भी पीछे नहीं हटूंगा. बता दें कि हेमाराम चौधरी के अलावा पूर्व मंत्री रमेश मीणा, विधायक वेद प्रकाश सोलंकी, मुरारी लाल मीणा और पूर्व मंत्री विश्वेन्द्र सिंह राजस्थान सरकार के कामकाज पर अपना असंतोष जाहिर कर चुके हैं.