साल 2002 के नरोडा पाटिया हत्याकांड में गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी के लिए फिलहाल फांसी की सजा की मांग नहीं करेगी एसआईटी. एसआईटी को मोदी सरकार ने फांसी की मांग की जो इजाजत दी थी उस पर रोक लगा दी गई है.
गौरतलब है कि बाबू बजरंगी और माया कोडनानी को जब अदालत ने दोषी करार दिया तो एसआईटी ने गुजरात सरकार से दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग करने की इजाजत मांगी. गुजरात सरकार ने इसकी इजाजत दे भी दी. लेकिन अब मोदी ने यू-टर्न लेते हुए एसआईटी को दी इजाजत पर रोक लगा दी.
अब मोदी सरकार यह दलील दे रही है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक किसी भी केस में सरकार को अपील में जाने के लिये एडवोकेट जनरल से सलाह-मशवरा करना जरूरी रहती है, जबकि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया.
विश्व हिंदू परिषद ने फांसी की सजा का किया था विरोध!
गुजरात के विश्व हिन्दू परिषद नेतृत्व ने राज्य सरकार के उस फैसले का विरोध किया है जिसमें 2002 के नरोडा पाटिया नरसंहार मामले में पूर्व राज्य मंत्री माया कोडनानी एवं 9 अन्य के लिए फांसी की सजा देने का अनुरोध किया जायेगा. इसके बाद मोदी सरकार पर दबाव बढ़ गया था.
क्या है नरोडा पाटिया मामला?
गुजरात में वर्ष 2002 में हुए दंगों के दौरान अहमदाबाद में स्थित नरोडा पाटिया इलाके में 97 लोगों की हत्या कर दी गई थी. ये नरसंहार 28 फरवरी 2002 को हुआ था. इस दंगे में 33 लोग घायल भी हुए थे.
यह घटना 27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन जलाए जाने के एक दिन बाद हुई थी. विश्व हिन्दू परिषद ने 28 फरवरी, 2002 को बंद का आह्वान किया था. इसी दौरान नरोडा पटिया इलाके में उग्र भीड़ ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था. नरोडा पाटिया कांड का मुकदमा अगस्त 2009 में शुरू हुआ और 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए थे. सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त विजय शेट्टी की मौत हो गई. अदालत ने सुनवाई के दौरान 327 लोगों के बयान दर्ज किए. इनमें पत्रकार, कई पीड़ित, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी और सरकारी अधिकारी शामिल थे.
29 अगस्त को न्यायधीश ज्योत्सना याग्निक की अध्यक्षता वाली अदालत ने बीजेपी विधायक और नरेन्द्र मोदी सरकार में पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी को हत्या और षडयंत्र रचने का दोषी पाया. 32 लोगों को दोषी करार दिया गया. अदालत ने मामले में अभियुक्त बनाए गए 29 अन्य लोगों को बरी कर दिया. माया कोडनानी को 28 साल कैद की सजा सुनाई गई. बाबू बजरंगी को मरते दम तक कारावास में रहने की सजा मिली तथा 30 अन्य को भी उम्रकैद की सजा मुकरर की गई.