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बिहार: अज्ञात बीमारी से 20 दिनों में 150 बच्चों की मौत

बिहार के मुजफ्फरपुर, गया और पटना के अस्पतालों में अज्ञात बीमारी से पिछले 20 दिनों के अंदर 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है.

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बिहार के मुजफ्फरपुर, गया और पटना के अस्पतालों में अज्ञात बीमारी से पिछले 20 दिनों के अंदर 150 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई है.

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कुछ चिकित्सक इस बीमारी को 'एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम' कह रहे हैं, जबकि हाल में दिल्ली से आई नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम लगातार बीमारी को लेकर अध्ययन कर रही है. राज्य के दस जिलों में इस बीमारी ने अब तक पांव पसार लिया है, जिस कारण सरकार ने इन सभी जिलों में चिकित्सकों की छुट्टी पर रोक लगा दी है. राज्य के मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) में अब तक 30 से ज्यादा और केजरीवाल अस्पताल में 60 से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है.

गौरतलब है कि पंद्रह वर्ष तक की उम्र के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. मरने वालों में से अधिकांश की आयु एक से सात वर्ष के बीच है.

चिकित्सकों के मुताबिक इस बीमारी का मुख्य लक्षण तेज बुखार, उल्टी-दस्त, बेहोशी और शरीर के अंगों में रह-रहकर कंपन होना है.

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राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा है कि मृतकों की संख्या में बढ़ोतरी का मुख्य कारण मरीजों का देर से अस्पताल पहुंचना है. वे कहते हैं कि इस बीमारी को देखते हुए मुजफ्फरपुर में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जहां एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की गई है. उन्होंने कहा कि प्रभावित जिलों के चिकित्सकों को टीम बनाकर गांवों में दौरा करने और मरीजों को तत्काल अस्पताल भेजने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है.

कई चिकित्सक इस बीमारी को 'एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम' कह रहे हैं, लेकिन अब तक हुई नमूना जांच या लैब टेस्ट के बावजूद इस रोग की सही पहचान नहीं हो पाई है. इस कारण चिकित्सक बीमारी की सटीक दवा भी तय नहीं कर पा रहे हैं.

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन ज्ञानभूषण कहते हैं कि दिल्ली से आई नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की छह सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने एसकेएमसीएच में पहुंचकर कई पीड़ितों की केस स्टडी की. कई मरीजों का एमआरआई और सिटी स्कैन भी कराया गया. साथ ही कुछ सैम्पल दिल्ली और पूना भी भेजे जा रहे हैं. टीम प्रभावित इलाकों का भी दौराकर रिपोर्ट इकट्ठा कर रही है.

उल्लेखनीय है कि बिहार सरकार ने इस बीमारी से मरने वाले सभी बच्चों के अभिभावकों को 50-50 हजार रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है.

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