सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे CM अखिलेश यादव को हाल ही में एक बार फिर सरेआम फटकार लगाई है. किसी को हैरानी इस बात पर नहीं है कि मुलायम ने उन्हें डांट क्यों पिलाई. लोगों को संतोष इस बात का है कि आखिर उन्होंने अपने बेटे को भरी सभा में फटकारने का 'जज्बा' तो दिखलाया.
खैर, यूपी के हालात ही कुछ ऐसे हो चले हैं, जिससे पब्लिक अपने रहनुमाओं की ओर देखने को मजबूर हो गई है. आम लोगों की तो यही चाह है कि पापा मुलायम अपने CM बेटे अखिलेश को कुछ और मुद्दों पर डांट पिलाएं, जिससे विकास की पटरी पर यूपी की गाड़ी दौड़ती रहे और लोग अमन-चैन के साथ गुजर-बसर कर सकें. ये रहे वो मुद्दे...
1. यूपी में जुर्म कब होंगे कम?
यूपी में कानून-व्यवस्था की हालत किसी से छिपी नहीं है. हत्या, बलात्कार, लूट जैसे अपराध तो प्रदेश के दामन पर कालिख पोत ही रहे हैं, थाने के भीतर होने वाले पुलिसिया जुर्म भी खाकी को दागदार किए जा रहे हैं. ऐसे में पहला सवाल तो यही बनता है कि आखिर यूपी में क्राइम का ग्राफ ऊपर जाना कब बंद होगा?
2. विकास के वादों का क्या हुआ?
यूपी के पिछले विधानसभा चुनाव में जनता ने विदेश में तालीम पाए अखिलेश यादव की इमेज को ध्यान में रखकर साइकिल पर बटन दबाया था. लोगों को यकीन था कि जब प्रदेश की कमान एक युवा नेता के हाथ में आएगी, तो राजनीति के साथ-साथ विकास की भी बयार बहेगी. अब सीएम साहब से पूछा जाना चाहिए कि वे बताएं, प्रदेश में विकास किधर है?
3. जात-पांत से ऊपर कब उठेंगे?
भले ही हमारा देश अब तक जात-पांत के दलदल से ऊपर नहीं उठ पाया हो, पर इसके लिए पब्लिक के साथ-साथ नेताओं को भी कोशिश करनी होगी. दिल्ली का उदाहरण सबके सामने है. एक नेता ने मजबूती से आगे बढ़कर बिजली-पानी जैसे जनहित के मुद्दों पर वोट मांगा और पब्लिक ने जाति-धर्म की सियासत को धता बताकर लगभग सारी सीटें उसकी झोली में डाल दी. अखिलेश इससे सबक लेंगे या बस एक-दो समुदाय को ही लालच देकर वोट जुगाड़ते रहेंगे.
4. मुफ्त के गैजेट्स और लैपटॉप की सियासत क्यों?
सरकार अगर शिक्षा-व्यवस्था सुधारने और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान दे, तो यह ज्यादा बेहतर स्थिति होगी. स्टूडेंट्स को मुफ्त के गैजेट्स और लैपटॉप बांटने की सियासत कब तक चलती रहेगी? ये भी जरूरतमंद स्टूडेंट्स के हाथों तक पहुंच रहा हो, इसमें भी भारी संदेह है.
5. किसानों की दशा सुधारने के लिए सिर्फ केंद्र पर निर्भरता क्यों?
प्रदेश की सरकार को चाहिए कि वे किसानों के फसल की बर्बादी के लिए सिर्फ केंद्र को कोसना छोड़ दे. केंद्र से मदद की बाट जोहने से पहले यूपी सरकार को आगे बढ़कर किसानों के नुकसान का सही-सही आकलन करना चाहिए और उचित मुआवजा देना चाहिए. बरसात में जो नदियां हर साल उफान पर आ जाती हैं और फसलें लील जाती हैं, उससे बचने के लिए नीतियां तैयार की जानी चाहिए. साथ ही जिन खेतों का कलेजा पानी के अभाव में फट जाता है, उसका दर्द दूर करने के लिए यूपी सरकार को प्लान बनाना चाहिए. अपनी जिम्मेदारी से भागने की सियासत कब तक?
...तो जनता के प्यारे 'नेताजी', अपने बेटे अखिलेश को इन अहम मुद्दों पर भी कभी डांट पिलाएंगे क्या???