वर्ष 2007 का अजमेर शरीफ विस्फोट हिन्दुओं को दरगाह पर जाने से रोकने के लिए कट्टरपंथियों के एक ऐसे समूह ने किया जिसमें बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक दोनों समुदायों के सदस्य शामिल थे. यह खुलासा मामले में आरोपी स्वामी असीमानंद ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में किया है.
असीमानंद ने अपने बयान में कहा ‘अजमेर विस्फोट के कुछ दिन बाद सुनील जोशी (आरएसएस का पूर्व प्रचारक जिसकी हत्या कर दी गई) मेरे पास आया. उसके साथ राज तथा मेहुल नाम के दो और लोग भी थे. वह कई मौकों पर शबरी धाम की यात्रा भी कर चुका था.’
बयान में असीमानंद ने कहा ‘जोशी ने दावा किया कि उसके लोगों ने बम विस्फोट को अंजाम दिया था और धमाके के वक्त वह भी अजमेर दरगाह में मौजूद था. उसने कहा कि इंद्रेश कुमार (आरएसएस के वरिष्ठ नेता) ने बम रखने के लिए उसे दो मुस्लिम लड़के मुहैया कराए थे.’ यह बयान दंड प्रक्रिया (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत एक मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया जो अदालत में मान्य है.
विस्फोटों के लिए दरगाह के चयन के बारे में स्वामी असीमानंद ने कहा, ‘अजमेर शरीफ ऐसी दरगाह है जहां हिन्दू भी बड़ी संख्या में जाते हैं. इस वजह से हमने अजमेर में बम रखा ताकि हिन्दू भयभीत होकर वहां जाना बंद कर दें.’ असीमानंद ने अपने बयान में आरएसएस के कई सदस्यों और उसकी केंद्रीय समिति के सदस्य इंद्रेश कुमार की मालेगांव, हैदराबाद और समझौता एक्सप्रेस विस्फोटों में भूमिका का भी जिक्र किया.{mospagebreak}
उन्होंने दावा किया कि 2005 में इंद्रेश उनसे मिले और कहा कि बम लगाने का काम उनका (असीमानंद का) नहीं है और उन्होंने इसके लिए जोशी को नियुक्त किया है.
उन्होंने कहा, ‘इंद्रेशजी 2005 में शबरी धाम (गुजरात में असीमानंद का आश्रम) में मुझसे मिले. उनके साथ आरएसएस के कई वरिष्ठ पदाधिकारी थे.. उन्होंने मुझसे कहा कि ‘बम के बदले बम’ की चर्चा मेरा काम नहीं है. उन्होंने कहा कि आरएसएस ने मुझे आदिवासी लोगों के बीच काम करने का निर्देश दिया है और उससे ज्यादा कुछ नहीं करने को कहा है. उन्होंने कहा कि वे लोग भी मेरे जैसा ही सोच रहे हैं और इसलिए सुनील (जोशी) को जिम्मेदारी दी गयी है और उन्हें हर मदद दी जाएगी.’ असीमानंद ने देश में मंदिरों में आतंकी हमलों के प्रतिशोध के तौर पर ‘‘बम के बदले बम’’ का प्रस्ताव किया था.
असीमानंद के बयान में लेकिन यह कहा गया है कि कई विस्फोटों को अंजाम देने वाले दक्षिणपंथी चरमपंथी एक दूसरे पर बहुत भरोसा नहीं करते थे.
भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 2007 में हुए विस्फोटों में 68 से ज्यादा लोग मारे गए थे जबकि 2008 के मालेगांव विस्फोटों में सात और 2007 के अजमेर दरगाह विस्फोटों में तीन लोगों की मौत हो गयी थी. असीमानंद ने खास निशानों के बारे में बात करने और इसके लिए धन उपलब्ध कराने की बात कबूल की. लेकिन विस्फोटों के बारे में उन्हें जानकारी घटना के बाद मिली.
उन्होंने मालेगांव विस्फोट मामले में एक अन्य आरोपी ले. कर्नल श्रीकांत पुरोहित के बारे में भी बात की जो गिरफ्तारी के समय सेना की खुफिया शाखा में नियुक्त थे.
असीमानंद ने पिछले साल 18 दिसंबर को दर्ज कराए एक बयान में कहा, ‘कर्नल पुरोहित ने मुझे यह भी कहा था कि इंद्रेशजी एक आईएसआई एजेंट हैं और उनके पास सभी दस्तावेज हैं. लेकिन पुरोहित ने मुझे वह दस्तावेज कभी नहीं दिखाया. सीबीआई ने मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में इंद्रेश से पूछताछ की थी और उसके एक बार फिर पूछताछ करने की संभावना है.