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कैश फॉर वोट कांड में अमर सिंह को जेल

कैश फॉर वोट मामले में समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह को जमानत नहीं मिली है. उन्हे तीस हजारी कोर्ट ने 19 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

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वर्ष 2008 के सनसनीखेज वोट के बदले नोट मामले में एक नाटकीय घटनाक्रम आ गया. राज्यसभा सदस्य अमर सिंह को तब गिरफ्तार कर लिया गया जब वह अचानक स्थानीय अदालत में पेश हो गये, जबकि पहले वह दावा कर चुके थे कि वह बीमार होने के कारण सुनवाई में हाजिर नहीं हो सकते.

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55 वर्षीय सिंह को जमानत नहीं मिली और उन्हें हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद अदालत ने उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया. वोट के बदले नोट मामले की धीमी जांच पर उच्चतम न्यायालय द्वारा नाखुशी जाहिर करने के बाद दिल्ली पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें अमर सिंह का भी नाम था.

विशेष न्यायाधीश संगीता ढिंगरा सहगल ने सिंह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. सिंह ने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर निजी तौर पर अदालत में पेश होने से छूट दिये जाने की मांग की थी लेकिन थोड़ी ही देर बाद वह अदालत में आ गये.

अदालत ने भाजपा के पूर्व सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोरा को जमानत देने से इनकार कर दिया. इस मामले में अपनी कथित संलिप्तता के लिये दोनों नेता अदालती समन के बाद पेश हुए थे. भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पूर्व सहयोगी सुधीन्द्र कुलकर्णी अदालत में पेश नहीं हुए. बताया जाता है कि वह विदेश में हैं. इस मामले में दाखिल आरोप पत्र में कुलकर्णी का भी नाम है.

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अदालत के सामने चिकित्सा आधार पर जमानत की मांग करते हुए अमर सिंह ने कहा कि उनका हाल ही में सिंगापुर में गुर्दा प्रत्यारोपण हुआ है और उन्हें लगातार चिकित्सकीय देखरेख की जरूरत पड़ती है. सिंह ने कहा, ‘मेरे गुर्दे खराब हो गए हैं और मैं उधार के गुर्दों पर जी रहा हूं. सार्वजनिक जीवन में रहने में खतरे हैं और मेरी मूत्र नलिका में भी संक्रमण हो गया है, जो मेरे उधार के गुर्दों के लिए खतरनाक है.’ न्यायाधीश ने हालांकि सभी चिकित्सा रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि इन दस्तावेजों में सितंबर 2010 के बाद की कोई जानकारी ही नहीं है.

न्यायाधीश ने सिंह से कहा, ‘सितंबर-अक्तूबर 2010 के बाद से आपका क्या चिकित्सा इतिहास रहा है. आपने जो मुझे दिया है, वह सितंबर 2010 के पहले का है.’ न्यायाधीश के सवालों का जवाब देते हुए सिंह ने कहा, ‘आज बहुत कम समय था, इसलिए मैं सभी रिपोर्ट्स नहीं ला सका.’

सिंह, कुलस्ते और भगोरा की जमानत याचिका खारिज करते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘तीनों ही अर्जियों में अंतरिम जमानत का आधार नियमित जमानत के समान ही है और इस पर उचित मौके पर विचार किया जायेगा. अपना जवाब दाखिल करें.’ अदालत ने कहा, ‘आरोपी अमर सिंह, फग्गन सिंह कुलस्ते और महाबीर सिंह भगोरा को हिरासत में लिया जाये और उन्हें 19 सितंबर को पेश किया जाये.’

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अदालत ने तीनों की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब दाखिल करने को कहा. इससे पहले, सिंह को अंतरिम जमानत देने की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र शरण और अधिवक्ता हरिहरन ने कहा, ‘इस मामले में कुछ भी नहीं है. इस बात की अत्यधिक संभावना है कि आखिरकार आरोपी दोषी करार नहीं दिये जायेंगे और हो सकता है कि उन्हें बरी कर दिया जाये.’

वकीलों ने कहा, ‘इस बात की कोई आशंका नहीं है कि सिंह सबूतों के साथ छेड़छाड़ करेंगे या फरार हो जायेंगे.’ पूर्व अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल शरण ने कहा कि सिंह जांच में दिल्ली पुलिस से सहयोग कर रहे हैं.

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि सिंह ने अपनी अस्वस्थता के बावजूद अदालत में हाजिर होने का फैसला किया और ‘इस अच्छे आचरण के चलते उन्हें जमानत दी जानी चाहिये’.

बहरहाल, अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जमानत याचिकाओं पर उनके गुण-दोष के आधार पर ही फैसला होना चाहिये और अगर याचिका पर विचार किया जाता है तो आरोपी के समाज में ओहदे, अपराध की गंभीरता और गवाहों को प्रभावित करने की आरोपी की क्षमता पर भी विचार किया जाना चाहिये.

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