आसिफ अली जरदारी का जन्म 26 जुलाई, 1955 को कराची में सिंध-बलोच जरदारी कबीले में हुआ. आसिफ अली अपने पिता हाकिम अली जरदारी की इकलौती संतान हैं. आसिफ अली जरदारी के पिता हाकिम अली अपने कबीले के सरदार थे. आसिफ अली जरदारी वर्तमान में पाकिस्तान के राष्ट्रपति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के सह अध्यक्ष हैं. उनकी पत्नी और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद वे 9 सितंबर 2008 को वे पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने. बिलावल, बख्तावर और आसिफा उनके तीन बच्चे हैं.
1969 में आसिफ अली जरदारी ने 'सालगिरह' नाम की एक पाकिस्तानी ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म में बाल कलाकार के रूप में काम किया. जरदारी अपनी जवानी के दिनों में पोलो के खिलाड़ी थे और 'जरदारी फोर' उनकी एक टीम थी, जिसके वे कप्तान हुआ करते थे. जरदारी की स्कूली शिक्षा को लेकर कई प्रश्न आज भी जिंदा हैं. हालांकि उन्होंने कराची ग्रामर स्कूल से प्राथमिक शिक्षा ली. उन्होंने कराची के सेंट पैट्रिक हाईस्कूल में भी पढ़ाई की है. स्कूल के कलर्क के अनुसार फाइनल एग्जाम में जरदारी फेल हो गए थे. उनकी ऑफिशियल बायोग्राफी में बताया गया है कि उन्होंने 1972 में पेटारो के कैडेट कॉलेज से ग्रैजुएशन की है.
शुरुआती राजनीतिक सफर में उन्हें निराशा ही हाथ लगी. 1983 में सिंध के नवाबशाह से डिस्ट्रिक काउंसिल के चुनाव में वे हार गए. इसके बाद उन्होंने रियल स्टेट में हाथ आजमाया. 18 दिसंबर 1987 को बेनजीर भुट्टो से उनकी शादी हुई. 1988 में जनरल जिया उल हक की एक प्लेन क्रैश में मौत के बाद बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं.
बेनजीर के हाथ में पाकिस्तान की बागडोर आयी तो जरदारी एकाएक बड़े महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए. कहा जाता है कि उस दौर में कोई भी डील बिना जरदारी के ग्रीन सिग्नल के नहीं होती थी. कहा जाता है प्रधानमंत्री के पति होने के नाते किसी भी प्रोजेक्ट को पास करवाने के लिए जरदारी ने अपना कमीशन फिक्स किया हुआ था और यही दौर था जब उनका नाम 'मिस्टर 10 पर्सेंट' पड़ गया. 10 अक्टूबर 1990 को अपहरण और वसूली के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. 90 के दशक में जरदारी ने पर्दे के पीछे से सियासत छोड़ सामने आने का फैसला किया और जेल में रहते हुए चुनाव लड़ा और जीते भी. 1993 में वे पहली बार पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार में मंत्री बने.
कार्यवाहक सरकार के बाद 1993 में ही चुनाव हुए तो बेनजीर एक बार फिर प्रधानमंत्री बनीं और जरदारी को बड़ी जिम्मेदारियां दी गई. 1996 में सरकार को बर्खाश्त कर दिया गया. इस बार भ्रष्टाचार और बेनजीर के भाई मुर्तजा भुट्टो की हत्या सरकार की बर्खाश्तगी का कारण बने. जरदारी पर मुर्तजा की हत्या के अरोप भी लगे हालांकि यह कभी साबित नहीं हो पाए. दुबई जाने की कोशिश में जरदारी को लाहौर में गिरफ्तार कर लिया गया और एक बार फिर वे जेल पहुंच गए. 1998 में स्विस सरकार ने बेनजीर और जरदारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जानकारी पाकिस्तान को दी. अगस्त 2003 में दोनों को इस मामले में दोषी करार दिया गया और स्विस सरकार ने उन्हें 6 माह की सजा भी सुनायी. कई मुश्किलों के बावजूद आज वे पाकिस्तान के राष्ट्रपति हैं.