लोकतंत्र में लोगों का मिजाज जानना एक मुश्किल काम है. सभी की चाहत अलग होती है, सभी की सोच अलग होती है. जाहिर है लोग चुनाव में किन मुद्दों पर और किस पार्टी को वोट देंगे ऐसे सवालों का जवाब पाना आसान नहीं.
लेकिन ये भी सच है कि चुनाव से पहले अब लोगों ने अपना मन तो बना ही लिया है और इसीलिए आजतक-इंडिया टुडे-मेल टुडे-ओआरजी ने सर्वे किया. चारों राज्यों के 15 फीसदी विधानसभा क्षेत्रों में लोगों के मन को टटोला गया है. 18 मार्च से लेकर 24 मार्च तक सर्वे किया गया. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 4000 लोगों पर किया गया ये ओपिनियन पोल. जबकि, असम और केरल में 3000 लोग सर्वे में शामिल किए गए. सर्वे में शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में बराबर-बराबर ध्यान दिया गया है. इस सैंपल में मिले रुझान के आधार पर ही सीटों के आंकड़ों को पेश किया गया है. अनुमान है कि इस रुझान में तीन फीसदी का फर्क आ सकता है. {mospagebreak}
पश्चिम बंगाल, वो राज्य जहां लेफ्ट और ममता की इज्जत दांव पर लगी है. ओपिनियन पोल से जो रुझान मिले हैं, उसके मुताबिक इस बार वो होगा, जो पिछले 34 साल में नहीं हुआ, ओपिनियन पोल कहता है कि कांग्रेस की मदद से वहां ममता की तृणमूल की सरकार बनेगी.
आजतक-इंडिया टुडे-मेल टुडे-ओआरजी ओपिनियन पोल ने जब पश्चिम बंगाल के लोगों से उनका मूड पूछा तो संकेत मिले कि वहां सरकार का रंग बदलेगा. बंगाल में 294 सीटें हैं और सर्वे के मुताबिक वहां तृणमूल और कांग्रेस के गठबंधन को 182 सीटें मिल रही हैं. लेफ्ट फ्रंट को सिर्फ 101 सीटें मिल रही हैं और इस तरह से टीएमसी-कांग्रेस गठबंधन बहुमत के आंकड़े 148 से काफी आगे दिख रहा है.
पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी को 33 और कांग्रेस को 26 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार दोनों के गठबंधन को सीटों का जबरदस्त फायदा होने का अनुमान है. इसके ठीक उलट पिछले चुनाव में 236 सीटों पर कब्जा जमाने वाले लेफ्ट फ्रंट को इस बार सीटों का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. {mospagebreak}
बंगाल के लोगों से पूछा गया कि आप मुख्यमंत्री के रूप में किसे देखना चाहते हैं, तो इसपर सबसे ज्यादा 48.6 फीसदी लोगों ने ममता बनर्जी का नाम लिया, जबकि बुद्धदेब भट्टाचार्य को करीब 20 फीसदी लोगों ने पसंद किया. राज्य के साढ़े पांच फीसदी लोग प्रणब मुखर्जी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. आखिर बंगाल में चुनाव के मुद्दे क्या होंगे. सर्वे के मुताबिक महंगाई को 92.6 फीसदी लोग सबसे बड़ा मुद्दा मानते हैं, जबकि 5 फीसदी से कम लोगों का कहना है कि महंगाई कोई मुद्दा नहीं है.
इसी तरह भ्रष्टाचार के सवाल पर करीब 84 फीसदी लोगों ने कहा कि हां, ये एक मुद्दा है, जबकि 11.7 फीसदी लोग इससे सहमत नहीं दिखे. बिजली, पानी, सड़क को बंगाल के 81 फीसदी लोग चुनावी मुद्दा मानते हैं, जबकि 16.3 फीसदी लोग इससे इत्तफाक नहीं रखते. इसी तरह राज्य के 83.2 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी को मुद्दा माना है और 13 फीसदी ने कहा है कि नहीं, बेरोजगारी कोई मुद्दा नहीं है. {mospagebreak}
अब बात अगर पश्चिम बंगाल में बदलती हवा की की जाए, तो वोटों की फीसदी में कोई खास बदलाव नहीं होगा. बल्कि 2009 की तुलना में ममता की पार्टी को एक फीसदी का नुकसान ही होगा. लेकिन सीटों के अनुमान में ममता तो आगे ही हैं. सर्वे में लोगों से ज्योति बसु और बुद्धदेब भट्टाचार्य की तुलना करते हुए सवाल पूछे गए. पूछा गया कि लोग किसे बेहतर मुख्यमंत्री के रूप में याद रखेंगे. बतौर रेल मंत्री ममता बनर्जी का काम लोग किस रूप में देखते हैं, सर्वे में एक सवाल ये भी था.
सर्वे में लोगों से पूछा गया कि अगर ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनती हैं तो वे कैसी मुख्यमंत्री साबित होंगी? कुछ लोग ये कहते हुए लेफ्ट की नीतियों की आलोचना करते हैं कि इसी की वजह से कोलकाता बाकी मेट्रो शहरों की तुलना में पिछड़ गया है. सर्वे में लोगों से पूछा गया कि वे इससे सहमत हैं या नहीं? तृणमूल के विरोधी उसपर नक्सलियों से साठगांठ का आरोप लगाते हैं. सर्वे में पूछा गया कि ये बात टीएमसी को फायदा पहुंचाती है या फिर उसे इसका नुकसान होता है.