योजना आयोग ने बिहार के लिए 2011-12 में 24,000 करोड़ रुपये की वाषिर्क योजना के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. यह वाषिर्क योजना मौजूदा वित्त वर्ष के लिए स्वीकृत योजना की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है.
योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिहं अहलूवालिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच करीब ढाई घंटे चली बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक में आयोग के सदस्यगण, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का दल भी शामिल थे.
अहलूवालिया ने राज्य सरकार के प्रदर्शन को कुल मिलाकर बेहतर बताया. उन्होंने कहा कि कृषि, शिक्षा तथा अन्य क्षेत्र में राज्य सरकार ने अच्छा काम किया है लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में अभी काफी कुछ किये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि आयोग ने ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों के लिये वी.के. शुंगलू समिति गठित की है.
राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि राज्य योजना पर आयोग के साथ बातचीत उपयोगी रही. अगले वित्त वर्ष के लिये मंजूर 24,000 करोड़ रुपये की राशि में राज्य सरकार का योगदान पहले से काफी बढ़ा है. इसमें राज्य सरकार अपनी बचत से 41 प्रतिशत राशि उपलब्ध करायेगी, 27 प्रतिशत राशि उधारी के जरिये जुटाई जायेगी जबकि केन्द्रीय सहायता से 32 प्रतिशत राशि मिलेगी.
राज्य सरकार के बेहतर वित्तीय प्रबंधन का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि जहां वर्ष 2004-05 में वाषिर्क योजना बजट में केन्द्रीय सहायता 70 प्रतिशत तक रहती थी वहीं अब यह सहायता घटकर 32 प्रतिशत रह गई है. छह साल पहले राज्य के अपने बचत और संसाधन जहां 9.26 प्रतिशत तक थे वर्तमान में यह राशि 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है. {mospagebreak}
नीतीश ने कहा कि वर्ष 2002 में केन्द्र सरकार ने पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिये राष्ट्रीय श्रम विकास योजना शुरू की थी. उसमें कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी से परियोजनाओं की लागत बढ़ गई. इस मुद्दे को हमने आयोग के समक्ष उठाया. उन्होंने कहा कि इसमें 3100 करोड़ रुपये तक लागत बढ़ी है. आयोग के समक्ष इस मांग को रखा है. इस दिशा में बात अब आगे बढ़ी है और 1450 करोड़ रुपये की राशि इसमें उपलब्ध कराई जायेगी.
बिजली क्षेत्र में राज्य के प्रयासों के बारे में नीतिश ने कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित कर रही है. राज्य में कांटी एवं बरौनी में ताप विद्युत परियोजना का विस्तार किया जा रहा है. एनटीपीसी के साथ संयुक्त उपक्रम के तहत नवीनगर में 660 मेगावाट की तीन इकाईयां लगाई जा रही हैं. राज्य में दीर्घकालिक आधार पर 450 मेगावाट विद्युत प्राप्ति की योजना है और इसके साथ ही 660 गुणा दो मेगावाट की तीन इकाईयों के लिये स्थल विकसित करने की योजना है.
उन्होंने अपने पुरानी सोच को दोहराते हुये कहा कि केन्द्रीय प्रायोजित योजनाओं की संख्या कम होनी चाहिये. केन्द्र को राज्यों के उसकी योजनाओं के लिये सीधे सहायता उपलब्ध करानी चाहिये. उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय विकास परिषद का पुराना प्रस्ताव है.
उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में तेजी से आगे बढ़ी है. वर्तमान मूल्यों पर राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 2005-06 एवं 2009-10 में 14.7 प्रतिशत रही है. वर्ष 2005-06 में राज्य की प्रति व्यक्ति वाषिर्क आय 7659 रुपये थी जो कि 2009-10 में 51 प्रतिशत बढकर 11,558 रुपये तक पहुंच गई.