दोस्ती, प्यार और मुहब्बत ये रिश्तों की नींव विश्वास होती है, लेकिन उन लड़कियों और महिलाओं आगाह होने की जरूरत है जो किसी अजनबी से दोस्ती करती हैं, उनकी बातों में फंसकर उन पर भरोसा करती हैं और फिर डेट पर जाने की पेशकश कबूल कर लेती हैं. ऐसी लड़कियां अब थोड़ी एहतियात बरतने की जरूरत है, क्योंकि हो सकता है कि आपकी पहली डेट ही आपकी ज़िंदगी बर्बाद कर दे.
दिल्ली में कुछ लड़कियों ने कबूल किया है कि पहली ही डेट में वे कथित रूप से बलात्कार का शिकार हुई हैं. सच तो यह है कि दुष्कर्म की ऐसी घटनाएं देश में तेजी से बढ़ती जा रही है, लेकिन लोगों के डर और बदनामी के कारण मामले थाने तक नहीं पहुंच पाते. इस तरह की पार्टी अक्सर शनिवार की रात ही होती है, जहां जवां दिलों की धड़कन अपने प्यार और दोस्ती को नये तरह से इजहार करती है. इन पार्टियों को सेटरडे नाईट फीवर के तौर पर भी जाना जाता है और शनिवार का यह बुखार देश के हर मेट्रो पर तेजी से चढ़ रहा है.
रात के दस बजे नहीं कि मेट्रो के हर पब और डिस्क पर नयी उम्र के लड़के-लड़कियों की भीड़ जमा हो जाती है. कई मेट्रो इस तरह की पार्टी की गिरफ्त में हैं जिसमें मुंबई, बैंगलोर, दिल्ली, पुणे, चंडीगढ़, गोवा, कोलकाता प्रमुख हैं. सेक्स, लव, धोखा और ड्रग्स की गिरफ्त में फंसती देश की युवा पीढ़ी को इस नशे से बचाने की पहली प्रमुख जिम्मेदारी पुलिस और नॉरकोटिक्स कंट्रोलब्यूरो दिल्ली में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के ज्वाईंट डायरेक्टर योगेश देशमुख भी इस बात को स्वीकार करते हैं और बताया कि जो आजकल ज्यादातर युवा ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक रेव पार्टिज की शुरूआत हिंदुस्तान में कुछ साल पहले गोवा और मुंबई से हुई. धीरे-धीरे इसका नशा बंगलौर और दिल्ली के पब कल्चर में बढ़ने लगा. मौज-मस्ती के लिये होने वाली रेव पार्टीज अब तेजी से देश में एक लत की तरह बढ़ती जा रही है. मगर मुंबई, दिल्ली, या बंगलौर में लड़कियां रेव पार्टी के जाल में फंसकर अपने दोस्त से पहली ही मुलाकात यानी डेट रेप का शिकार हो जाती है.
दिक्कत यह है कि डेट रेप करने वालों की समय रहते पहचान कर पाना संभव नहीं है. डेट रेप की साज़िश का पहला जाल इंटरनेट पर सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स के जरिए बुना जा रहा है और इसका आखिरी छोर होता है कोई फार्म हाउस, कोई सूनसान मकान या फिर नाइट क्लब. मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में लड़कों के ऐसे कई ग्रुप हैं जो दोस्ती के नाम पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लड़की फंसाने का जाल बुनते हैं. इंटरनेट पर दोस्ती हुई नहीं कि मोबाइल नंबरों की लेन-देन होते देर नहीं लगती और एक बार मोबाइल नंबर आया तो फिर शुरू हुआ मोबाइल पर बहकी-बहकी बातों का दौर.{mospagebreak}
लड़की से दोस्ती और फिर प्यार का इजहार होने के बाद डेट रेप के माहिर लड़के अच्छा इम्प्रेशन दिखाने के लिये पहली मुलाकात जान-बूझ कर सार्वजनिक जगहों या फिर रेस्टोरेंट में करते हैं. लड़की के दिल में थोड़ा-सा विश्वास जमा नहीं कि फिर शुरू होता है शिकार को पार्टी के बहाने फार्म हाउस या फिर ऐसे ही किसी सुनसान ठिकाने तक बुलाने की साजिश. यानि लड़का,लड़की को किसी बहाने फार्म हाउस या फिर बंगले पर बुलाता है. विश्वास जीतने के लिये कुछ और दोस्त भी बुलाए जाते हैं, ताकि लड़की एकांत देखकर उलटे पैर वापस ना लौट जाए.
लड़की को पूरी तरह विश्वास में लेने के लिए बर्थ डे केक भी कटता है और फिर मौज-मस्ती का दौर शुरू होता है. ड्रिक्स और जाम के दौर के बाद जब भीड़ छंटनी शुरू होती है तो बचते हैं डेट रेप के शिकारी और उनकी शिकार लड़की. लड़की जब एक-दो जाम ले चुकी होती है तो धीरे से उसके गिलास में ड्रग्स की दो बूंद मिला दी जाती है. ड्रिंक्स लेते ही कुछ ही देर में लड़की मदहोश होने लगती है.
डेट पर बुलाकर किसी लड़की के साथ रेप करने के लिए जिन ड्रग्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, वो दवा की दुकानों पर धड़ल्ले से बिक रही हैं. आमतौर पर जिन पार्टियों में डेट रेप की साज़िश रची जाती है, वहां भी इन ड्रग्स का इंतज़ाम पहले से होता है. ये ड्रग्स बेहद खतरनाक है. इनकी सिर्फ दो बूंद या एक गोली पंद्रह मिनट में किसी लड़की को लाचारी की हद तक मदहोश बनाने के लिए काफी है.{mospagebreak}
ड्रिंक्स में 'केटामाइन हाइड्रोक्लोराइड' की दो बूंद मिलाई जाती हैं. देश में जानवरों के एनेस्थीसिया यानी बेहोशी की दवा के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है. केटामाइन में नींद की दवा वेलियम से बीस गुना ज्यादा ताकत है. केटामाइन अलग-अलग दवा के तौर पर मेडीकल स्टोर पर उपलब्ध है. कैटामाइन के अलावा डेट रेप में इस्तेमाल होती है 'रोपेनॉल' जिसे 'लव ड्रग्स' के नाम से भी जाना जाता है. 'फ्लूनिट्राजापाम' के ब्रांड नेम से बिकने वाले रोपेनॉल को डेट रेप की साज़िश रचने वाले सबसे कारगर दवा मानते है. एक और ड्रग्स है 'जीएचबी' यानी 'गामा हाइड्रो ब्यूटिरिक एसिड', जिसका ना रंग है, ना स्वाद और ना ही कोई गंध. लेकिन गले से उतरते ही शिकार को मदहोश कर देती है यह दवा.
जानकारों के मुताबिक, डेट रेप में शिकार को जो ड्रग्स ड्रिंक्स में मिलाकर दिये जाते हैं उनका असर काफी तेजी से होता है. ये दवाएं दस मिनट में ही असर करके लड़की को मदहोश कर देती हैं. इन दवाओं का असर सात से आठ घंटे तक रहता है. दवा का असर रहते लड़की की याददाश्त कमजोर हो जाती है और उसे अपने साथ हुए दुष्कर्म की याद नहीं रहती है. जाहिर तौर पर याददाश्त की कमजोरी और लोगों के डर से लड़कियां ऐसे मामले दर्ज करने से कतरा जाती हैं. लेकिन लड़कियों के दिलो-दिमाग पर इस हादसे का भारी असर पड़ता है. {mospagebreak}महानगरों में लड़कियों और महिलाओं के साथ डेट रेप का खतरा गहरा गया है. दिक्कत यह भी है कि सिर्फ आशंका के चलते वह ना तो दोस्तों से दूर हो सकती हैं और ना दोस्त के बुलाने पर बर्थ डे या किसी और पार्टी से. बेशक आप पार्टी में जाएं, नाइट क्लब में जाएं, लेकिन हमेशा चौकन्ना रहें. जानकारों के मुताबिक लड़कियां अगर थोड़ा-सा भी एहतियात बरते तो ऐसी पार्टियों में शरीक होकर भी डेट रेप के खतरे से बच सकती हैं.
1.किसी पार्टी में अकेले या केवल एक लड़के के साथ जाने की बजाय ग्रुप में जाएं.
2.ग्रुप में एक-दो लोग ऐसे जरूर हों जिन पर आपको पूरा भरोसा हो.
3. पार्टी में शराब पीने की जगह केन में मिलने वाला जूस या ड्रिंक्स ले.
4.अगर शराब पी रही हैं तो अपना गिलास अपने ही हाथ में रखें और अपने सामने पैग बनवाएं.
5. फार्म हाउस की जगह बड़े होटल के डिस्क या बार में ही पार्टी करें.
6.पार्टी से लौटते समय किसी से लिफ्ट ना लें बल्कि भरोसे के दोस्तों के साथ ही ड्रॉपिंग ले.
7.रेडियो टैक्सी का नंबर मोबाइल में रखे और इमरजेंसी के समय रेडियो टैक्सी का इस्तेमाल करें.
8. पार्टी के समय जरा-सा भी चक्कर आए या तबीयत में बदलाव महसूस करें तो फौरन अपने ग्रुप के साथ पार्टी से बाहर निकल जाएं.{mospagebreak}फिलहाल देश में डेट रेप और धोखे से ड्रग्स खिलाने के बढ़ते चलन पर शिकंजा कसने के लिए जांच एजेंसियां और सरकार दोनों ही गंभीर हैं. इस मामले में जहां जांच एजेंसियां डेट रेप ड्रग्स के बनाने वालों पर कानूनी शिंकजा कसने में जुटी है वही सरकार भी सामाजिक भागीदारी का इस्तेमाल कर नौजवानों को ड्रग्स का शिकार होने से रोकने के लिये नयी नीति बना रही है.
हिंदुस्तान में जिस वक्त लोग ऐसी वारदातों को फिल्मी कल्पना मान रहे थे, उन दिनों अमेरिका में डेट रेप के मामले इतने बढ़ चुके थे कि 1996 में डेट रेप से निपटने के लिए कानून बनाने की नौबत आ गई. 1996 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने 'ड्रग इंड्यूस्ड रेप प्रिवेंशन एंड पनिशमेंट एक्ट' पर हस्ताक्षर किया. इस कानून के तहत 'रोपेनॉल' नाम के ड्रग के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई. चार साल बाद इस कानून के दायरे में 'जीएचबी' नाम का ड्रग्स भी शामिल कर लिया गया, क्योंकि अमेरिका में डेट रेप के लिए इन्हीं नशीली दवाइयों का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जा रहा था. अमेरिका में अब इन दोनों ड्रग्स का इस्तेमाल करने वाले को 20 साल तक कैद की सज़ा हो सकती है.