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दौलत के लिए 'भगवान' का भी हुआ कत्‍ल!

वो अच्छे घर में पैदा हुई, कॉनवेंट स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की. फर्राटेदार अंगेजी बोलती थी. पास में करोड़ों की दौतल थी, हमारे समाज की एक बिरादरी उसे अपना भगवान मानती थी लेकिन एक दिन इसी भगवान का क़त्ल हो गया.

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वो अच्छे घर में पैदा हुई, कॉनवेंट स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की. फर्राटेदार अंगेजी बोलती थी. पास में करोड़ों की दौतल थी, हमारे समाज की एक बिरादरी उसे अपना भगवान मानती थी लेकिन एक दिन इसी भगवान का क़त्ल हो गया.

साल 2009, जगह गांधीनगर. गांधीनगर लोकसभा चनाव में खुद के लिए वोट मांग रही ये सोनिया डे. सोनिया के सामने चुनाव में कोई और नहीं बीजेपी के कद्दावर नेता लालकृष्ण आडवाणी लड़ रहे थे.

साल 2010, जगह अहमदाबाद. दुल्हन के लिबास में लिपटी सोनिया. ये अपने साजन का इंतज़ार कर रही है. इसके भी अरमान है अपने साजन के साथ ज़िंदगी बिताने के.

साल 2011,  जगह अहमदाबाद, रैंप पर चलती लड़की ये भी सोनिया.

साल 2011, जगह अहमदाबाद. अन्ना हज़ारे के समर्थन में रैली निकालते हुए भी ये वही सोनिया है. सोनिया अहमदाबाद की सड़कों पर अन्ना के लिए तब उतरी थी जब अन्ना दिल्ली में रामालीला मैदान में अनशन पर बैठे हुए थे.

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साल 2011, जगह अहमदाबाद. और अब सोनिया ज़िंदा नहीं है.

सोनिया कानवेंट स्कूल में पढ़ी-लिखी, खूबसूरत अच्छे घर से आई, फर्राटेदार अंगेजी बोलने वाली कोई और नहीं बल्कि एक किन्नर थी. एक ऐसी किन्नर जिसे कुद किन्नर बिरादरी पना भगवान मानती थी. एक ऐसी किन्नर जिसके पास करोड़ों की दौलत थी. एक ऐसी किन्नर जिससे लोग प्यार भी, श्रद्धा भी रखते थे पर डरते भी उतना ही थे.

उसी सोनिया की गोली मार कर सरेआम हत्या कर दी गई?

ऑल इंडिया किन्नर एसोसिएशन की अध्यक्ष सोनिया का मर्डर अपने पीछे कई राज समेटे है. आखिर क्या इस सनसनीखेज़ क़त्ल के पीछे का पूरा सच?

क़त्ल दरअसल किन्नरों की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया का हुआ था और पुलिस को भी सोनिया की हैसियत का अंदाज़ा उसके घर पहुंच कर ही हुआ. दरअसल सोनिया कोई मामूली किन्नर नहीं थी. बल्कि अपने पीछे वो करोड़ों की मिलकियत छोड़ कर गई है. तो क्या सोनिया का कत्ल इसी दौलत के लिए किया गया? या फिर साजिश कुछ और है?

तारीख, 24 नंवबर 2011. रात के 8:15 बजे थे. जगह वही पुराना अहमदाबाद. शहर के रुपाली सिनेमा थियेटर के बाहर एक गाड़ी आकर रुकती है. गाड़ी से किन्नरों की अध्यक्ष सोनिया डे उतरती है. वो यहां पानीपूरी खाने के लिए आई है. अभी सोनिया गाड़ी से उतरी ही थी कि तभी एक ऑटो रिक्शा उसके पास आ कर रुकता है. उसमें से दो शख्स उतरते हैं और वो सोनिया पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरु कर देते हैं. एक गोली सोनिया के सिर में लगती है और तीन छाती में. सोनिया की मौके पर ही मौत हो जाती है.

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अहमदाबाद के डीसीपी हरेक्रिश्न पटेल के अनुसार रात 8.15 बजे इमरान उर्फ सोनिया यहां पानीपुरी खाने आय़ी थी, तब ही कुछ अनजान लोगो ने आकर उस पर फायरिंग कि और वही पर उसकी मौत हो गयी. हालांकि अभी तक हत्यारों के बारे में कुछ पत्ता नही चल पाया है.

शहर में सरेआम हुई इस हत्याकांड़ की खबर जैसे ही फैली पूरी की पूरी कन्नर बिरादरी में हड़कंप मच गया. कत्ल उनकी सबसे ताकतवर नेता और रष्ट्रीय अध्यक्ष का हुआ था. किन्नरों की आपसी रंजिश के इतिहास को देखते हुए पुलिस का पहला शक बिरादरी की दुश्मनी पर ही गया. लिहाजा पुलिस ने सोनिया के घर और रिश्तेदारों से ही पूछताछ कर तफ्तीश को आगे बढ़ाने का फैसला किया. लेकिन पुलिस जब सोनिया के घर पुहंची तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं.

15 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति, लाखों के ज़ेवरात, अहमदाबाद और माउंट आबू में बंगला, महंगी गाड़ियां, अहमदाबाद में एक रेस्तरां और करोड़ों का बैंक-बैलेंस.

सोनिया के घर जाने के बाद पहली बार पुलिस को सोनिया की हैसियत का अंदाजा हुआ.  तो क्या सोनिया का कत्ल इसी दौलत की खातिर हुआ? पुलिस की तफ्तीश यहीं से शुरू हुई? बकौल पुलिस शुरूआती तफ्तीश में सोनिया की हत्या किन्नरों की आपसी रंजिश का ही नतीजा लगती है.

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सोनिया डे की किन्नरों के एक दूसरे ग्रुप संजू डे के साथ लंबे अर्से से दुश्मनी चली आ रही थी और दोनों में अक्सर शहर पर वर्चस्व को लेकर झगड़ा होता रहता था. दूसरे ग्रुप की निगाहें सोनिया की अथाह दौलत पर भी थी.

तफ्तीश के दौरान पुलिस को ये भी पता चला कि सोनिया का अपने पति युसूफ के साथ रिश्ता उतना अच्छा नहीं था. पर इसके बावजूद सोनिया ने बहुत सी संपत्ति यूसुफ के ही नाम कर रखी थी. तो फिर यूसुफ सोनिया को क्यों मारेगा? पर सोनिया के घरवालों का कहना है कि युसूफ ऐसा कर सकता है.

सोनिया कि माँ नासिर अजमेरी बताती हैं कि युसुफ और उसके बीच में पैसे के लिये लड़ाई होती रहती थी. सोनिया ने माउन्ट आबू की प्रोपर्टी उसके नाम कर दी थी. बगंला भी लिया था फिर भी वो हर महीने और पेसे मांगता था.

फिलहाल पुलिस ये पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि सोनिया के कत्ल से सबसे ज्यादा किसका फायदा हो सकता है? क्योंकि ये तो तय है कि सोनिया पर गोली चलाने का मकसद उसका क़त्ल करना ही था क्योंकि जब उसका क़त्ल हुआ तब उसके पर्स में डेढ लाख रुपए थे. लेकिन क़ातिलों ने उसके पर्स को हाथ तक नहीं लगाया.

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सोनिया डे ये वो नाम हे, जिसे उसके साथ रहने वाले किन्नर उनका भगवान मानते थे. सोनिया अगर दोस्ती करती थी तो उसे भी अपने दिल से निभाती भी थी ओर दुश्‍मनी करती थी तो उसे भी निभाती थी.

रात गवाईं सयन करि..दिवस गंवायो खाए
हीरा जनम अमोल यह, कौड़ी बदले जाए

जो गरीब पर हित करै, सो रहीम बड़ लोग
कहां सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताइ

बड़े ना हूजै गुनन बिन, बिरद बड़ाई पाए
कहत धतुरे सो कनक, गहनो गडायो ना जाए

कदली, सीप, भुजंग-मुख, स्वाति एक गुण तीन
जैसी संगति बैठिए, तैसो ही फल दीन

आवत ही हर्षे नहीं, नयनन नहीं स्नेह
तुलसी  तहां ना जाइए, कनचन बरसे मेह

विद्या धन उद्यम बिना, कहो जु पावे कौन
बिना डुलाए ना मिले, ज्यों पंखा की पौन

सोनिया किन्नरों की महागुरु थी और उसके रुतबे का इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि उसके चेले पूरे देश में थे और उसके चेले भी मानते हैं कि सोनिया के जितने दोस्त थे उसके दुशमन भी उतने ही थे.

सोनिया की एक चेली कंगना बताती है कि सोनिया के जितने चाहने वाले थे, उतने ही दुशमन थे.

सोनिया के पिता का अहमदाबाद में केबल का अपना बिज़नेस था. सोनिया का बचपन अपनी नानी के साथ मुबई में बीता. मुंबई में ही उसने एक कॉन्वेंट स्कूल से अपनी पढाई पूरी की थी. इसीलिए वो फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोलती थी. सोनिया के बचपन का नाम इमरान अजमेरी था लेकिन किन्नर समाज में आने के बाद उसने अपना नाम बदल कर सोनिया रख लिया था.

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परिवार से नाता तोड़ने के बाद सोनिया ने अपनी एक अलग दुनिया बसाई. बहुत ही कम वक्त में उसने अहमदाबाद के किन्नर समाज में अपना दबदबा बना लिया. इसके बाद फिर सोनिया ने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

सोनिया अपने चेलों के साथ अहमदाबाद के पॉश इलाकों में शगुन के लिये घुमा करती थी. उसकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया यही था. लेकिन बकौल पुलिस सोनिया किन्नर समाज से भी चंदा वसूलती थी. इसके अलावा उसके कई दूसरे धंधे भी थे जिसके बारे में पुलिस जांच कर रही है.

सोनिया की एक अन्‍य चेली माया बताती हैं कि सोनिया कि हत्या पैसे के लिये ही की गयी है.

सोनिया ने 2002 में अहमदाबाद में विधानसभा चुनाव लड़ा था और साल 2004 और 2009 में उसने लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ा था लेकिन दोनों बार उसकी जमानत ज़ब्त हो गयी थी.

सोनिया ने इसी बीच युसुफ नाम के एक शख्स से शादी भी की और उसने अपनी करोड़ों की प्रोपर्टी में कई बंगले और कई दूसरी चीजें युसुफ के नाम से खरीदी थी.

सोनिया के जितने चाहने वाले थे उतने ही दुशमन थे, लेकिन इतना तो साफ हे कि सोनिया की हत्‍या हो चुकी है.

फिलहाल पुलिस इस जांच में जुटी है कि आखिर सोनिया की मौत से सबसे ज्यादा फायदा किसे होने वाला था. क्योंकि पुलिस का मानना है कि कातिल की नजर कहीं ना कहीं सोनिया की दौलत पर ही गड़ी थी.

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