पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक ए क्यू खान का मानना है कि उन्होंने परमाणु बम बना कर पाकिस्तान के लिए काम किया, पर उनके काम से ‘सबसे ज्यादा फायदा पाने वाली सेना ने उनकी पीठ में छुरा घोंप दिया.’
पाकिस्तानी सेना से ‘विशेष पेंशन’ पा रहे खान ने तर्क दिया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के बाद से युद्ध नहीं हुआ है क्योंकि दोनों देशों के पास परमाणु प्रतिरोधक क्षमता है और दोनों परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के परिणामों से अवगत हैं.
उन्होंने जर्मनी की ‘डेर स्पीगल’ पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘परमाणु हथियारों का इस्तेमाल इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि दोनों देश जानते हैं कि दूसरा पक्ष इसका जवाब दे सकता है.’ इस बात पर जोर देते हुए कि यूरोप में परमाणु प्रतिरोधकता के कारण 1945 से कोई युद्ध नहीं हुआ है, उन्होंने कहा कि यही बात ‘भारत और पाकिस्तान के लिए भी 1971 के बाद से सच है.’
खान ने कहा, ‘करगिल का युद्ध (1999) स्थानीय स्तर का था और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का मुद्दा कभी नहीं उठा. हम भोले हो सकते हैं, पर हम मूर्ख नहीं हैं. दोनों पक्ष जानते हैं कि इसके क्या परिणाम हो सकते हैं.’ खान से पूछा गया था कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच का परमाणु युद्ध कोई एक देश जीत सकता है.
खान ने 2004 में स्वीकार किया था कि वह छिप कर परमाणु प्रसार नेटवर्क चला रहे हैं, जिसके बाद उन्हें नजरबंद कर दिया गया था. उन्होंने टीवी पर सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया था कि उन्होंने लाभ के लिए परमाणु तकनीक बेची. इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘मैंने पूरे घटनाक्रम की अकेले जिम्मेदारी ली क्योंकि राजनीतिक नेतृत्व ने मुझसे फौरन ऐसा करने को कहा था.’
खान ने कहा, ‘पूर्व सैन्य शासक जनरल परवेज मुशर्रफ ने मुझे माफी देने और पुनर्वास करने का वादा किया था. पर कुछ ही दिन बाद मेरे साथ गड़बड़ शुरू हो गई और उन्होंने सशर्त माफी की बात शुरू कर दी, जिसके परिणाम सभी जानते हैं.’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें महसूस होता है कि उनके साथ चाल चली गई, उन्होंने कहा, ‘चाल का शिकार होना सही शब्द नहीं होगा. मुझे लगता है कि हर उस आदमी ने, जिसे मेरे काम से फायदा हुआ, उसने मेरी पीठ में छुरा घोंपा, उदाहरण के लिए फौज.’
उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें परमाणु बम बनाने का खेद है, उन्होंने जवाब दिया, ‘मुझे अब भी लगता है कि मैंने पाकिस्तान के लिए बड़ा काम किया.’ खान ने दावा किया कि पाकिस्तान को भारत के परमाणु परीक्षणों और राजनीतिक आक्रामकता के कारण ‘मजबूरन परमाणु हथियार बनाने पड़े.’
खान से पूछा गया कि पिछले महीने कराची में नौसेना के हवाई प्रतिष्ठान पर आतंकवादियों के हमले के बाद क्या पाकिस्तान के परमाणु हथियार सुरक्षित हैं, उन्होंने कहा, ‘यह पूरा हो-हल्ला पश्चिम द्वारा मचाया गया है. हमारे परमाणु हथियारों को न तो कभी खतरा था, न है और न ही आगे होगा.’
खास तौर पर लीबिया, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ परमाणु प्रसार के व्यापार में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘मैं प्रसार में लिप्त नहीं था और ‘ए क्यू खान नेटवर्क’ जैसी कोई चीज है ही नहीं.’ खान ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय आपूर्तिकर्ता ‘हर उस व्यक्ति को जरूरत का सामान बेचने के इच्छुक हैं, जो खरीदना चाहता है और उन्हें इसके लिए मेरी जरूरत नहीं है.’