लोकपाल विधेयक मसौदा समिति में शामिल अन्ना हजारे पक्ष ने सरकार के समक्ष पेशकश की कि अगर उनके उठाए मुद्दों को वह अनुचित मानती है तो इस संबंध में जनमत संग्रह करा ले.
संयुक्त समिति में शामिल वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने चल रहे हजारे के अनशन के दौरान कहा कि अगर सरकार लोकपाल के संबंध में हमारे उठाए विषयों को अनुचित मानती है तो वह अपने विधेयक और हमारे विधेयक पर जनमत संग्रह करा सकती है. इससे साफ हो जाएगा कि हमारे उठाए मुद्दे जायज़ हैं.’’
उन्होंने कहा कि जब संयुक्त मसौदा समिति बनी थी तो उसका मकसद यह था कि सरकार के साथ ही समाज के पक्ष की भी राय ले कर विधेयक का मसौदा तैयार किया जाएगा. लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार अपनी मर्जी से लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करना चाहती है जिसमें प्रस्तावित लोकपाल के दायरे में सांसद, सांसदों का आचरण, प्रधानमंत्री तथा न्यायपालिका को नहीं रखा जाएगा.
प्रशांत भूषण ने कहा कि सरकार ने यह दलील दी है कि रामलीला मैदान से अनशनकारियों को इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि वे सरकार के साथ हुए समझौते से मुकर रहे थे. अगर यह दलील मान भी ली जाए कि बाबा रामदेव अपने वादे से मुकर रहे थे तब भी क्या हर नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं है.
उच्चतम न्यायालय ने भी अपने विभिन्न फैसलों में कहा है कि जनता को शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित हो कर प्रदर्शन करने से नहीं रोका जाना चाहिए. उनसे पहले पूर्व विधि मंत्री शांति भूषण ने कहा कि जनता की आवाज में बल तब ही आता है जब वह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करे. संविधान हमें शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा हो कर प्रदर्शन करने का अधिकार देता है. उन्होंने कहा कि लोकपाल विधेयक बनवाना तो पहली लड़ाई है. हजारे के नेतृत्व में अगली लड़ाई चुनाव सुधार और नए सुधारों के लिए लड़ेंगे.