ओपिनियन पोल के मुताबिक इस बार तमिलनाडु में भी सरकार बदल सकती है. एआईएडीएमके गठबंधन को बहुत आसानी से बहुमत मिलता दिखाई पड़ रहा है.
तमिलनाडु में किसकी सरकार बनेगी. आजतक-इंडिया टुडे-मेल टुडे-ओआरजी ओपिनियन पोल के आंकड़े कहते हैं कि गद्दी पर इस बार जयललिता बैठेंगी. तमिलनाडु विधानसभा में 234 सीटें हैं और सर्वे कहता है कि इनमें से 164 पर एआईएडीएमके गठबंधन का कब्जा होगा. अनुमान है कि डीएमके को सिर्फ 68 सीटें मिलेंगी, जबकि तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटें चाहिए.
साल 2006 के चुनाव से तुलना करें तो एआईएडीएमके गठबंधन को तब सिर्फ 69 सीटें मिल पाई थीं, जबकि डीएमके ने 163 सीटों पर कब्जा किया था. तमिनलाडु के लोगों से पूछा गया कि वे किसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहते हैं, तो जयललिता के पक्ष में 36 फीसदी से ज्यादा लोगों ने हां कहा, जबकि करीब 34 फीसदी लोग करुणानिधि को बतौर मुख्यमंत्री पसंद करते हैं. {mospagebreak}
राज्य के साढ़े तीन फीसदी लोग स्टालीन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. आखिर चुनाव के मुद्दे क्या होंगे, तमिलनाडु के 59.3 फीसदी लोग इसके जवाब में कहते हैं- महंगाई, जबकि करीब 27 फीसदी इससे इत्तफाक नहीं रखते. करीब 50 फीसदी लोग भ्रष्टाचार को चुनावी मुद्दा मानते हैं, जबकि 33.6 फीसदी लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार कोई चुनावी मुद्दा है ही नहीं.
इसी तरह बिजली-पानी-सड़क को तमिलनाडु के 43.6 फीसदी लोग वोट को लेकर अहम मानते हैं और 40 फीसदी कहते हैं ये कोई मुद्दा नहीं है. राज्य के 37.5 फीसदी वोटर बेरोजगारी को अहम चुनावी मुद्दा मानते हैं, जबकि 44.4 फीसदी का कहना है कि नहीं, बेरोजगारी कोई मुद्दा नहीं है.
तमिलनाडु के वोटरों से एक सवाल ये पूछा गया कि करुणानिधि और जयललिता दोनों में से किसकी सरकार को वे ज्यादा भ्रष्ट मानते हैं. क्या 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में करुणानिधि परिवार का नाम आना इस चुनाव का एक मुद्दा है, सर्वे में एक सवाल ये भी था. श्रीलंका की सेना के हाथों मारे गए भारतीय मछुआरों के मसले में करुणानिधि सरकार का जो रुख रहा, क्या लोग उससे संतुष्ट हैं, सर्वे में एक सवाल ये भी था.