भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सियासी चेहरों पर तीर चलाने में माहिर अरविंद केजरीवाल ने इस बार देश के बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनकी कंपनी आरआईएल को निशाने पर लिया है.
आरआईएल व सरकार की मिलीभगत
अरविंद केजरीवाल ने खुलासा किया है कि रिलायंस इंड्रस्ट्रीज लिमिटेड और सरकार की मिलीभगत के कारण ही गैस के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि रिलायंस लगातार मनमानी और दादागिरी कर रही है. उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा है कि देश को मनमोहन सिंह नहीं, बल्कि मुकेश अंबानी चला रहे हैं.
सुनाया नीरा राडिया का ऑडियो टेप
अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे पहले नीरा राडिया और रंजन भट्टाचार्य का ऑडियो टेप सुनाया, फिर अपनी ओर से जमकर आरोपों के तीर बरसाए. गौरतलब है कि रंजन भट्टाचार्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दामाद हैं.
ठेके का गलत इस्तेमाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि साल 2000 में रिलायंस को एनडीए की सरकार ने केजी बेसिन से गैस निकालने का ठेका दिया. उम्मीद थी कि रिलायंस ज्यादा से ज्यादा गैस निकालेगी, लेकिन रिलायंस ने जमाखोरी करना शुरू कर दिया. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि रिलायंस ने ठेके का गलत इस्तेमाल करते हुए गैस की कीमत पर सरकार से बार-बार सौदेबाजी की.
रिलायंस को पहुंचाया गया फायदा
टीम केजरीवाल ने कहा कि आज रिलायंस के 31 में से केवल 13 कुएं ही काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुरली देवड़ा के पेट्रोलियम मंत्री रहते हुए मुकेश अंबानी की कंपनी को 1 लाख करोड़ का फायदा हुआ. केजरीवाल ने कहा कि यह घोटाला एकदम कोयला घोटाले जैसा ही है.
'मुरली देवड़ा रिलायंस के आदमी'
अरविंद केजरीवाल ने मुरली देवड़ा पर रिलायंस का आदमी होने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘जो मणिशंकर अय्यर ने रिलायंस के लिए नहीं किया, वो मुरली देवड़ा ने किया.’ सीएजी ने कहा कि यह सिंगल टेंडर अनुबंध है. रिलायंस ने सभी साजोसामान एक ही कंपनी से खरीदे हैं. हम इस डील की जांच चाहते हैं.
हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला
केजरीवाल ने मुंबई हाईकोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि रिलायंस का रेट ज्यादा है और कंपनी मुनाफा भी ज्यादा कमा रही है.
केजरीवाल ने कहा, ‘रिलायंस ने एनटीपीसी को 4.25 डॉलर में गैस देने का वादा किया था, लेकिन पहले इसे 6.25 डॉलर किया गया और फिर 14.25 डॉलर.’ उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों इस बढ़ोतरी का भार ग्राहकों पर दिया जाए.
अरविंद ने बताया, ‘डील तय हुई थी कि 8 करोड़ यूनिट गैस निकाला जाएगा लेकिन 1 सालों के बाद भी केवल 3 करोड़ यूनिट गैस ही निकाली गई है. इसका साफ मतलब है कि रिलायंस गैस की जमाखोरी कर रहा है और यह गैस एनटीपीसी को तभी मिलेगी जब इसकी कीमत 14.25 डॉलर प्रति यूनिट हो जाएगी.’
प्रधानमंत्री से मांगे जवाब
केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से तीखा सवाल पूछा कि आखिर इतना सब हो जाने पर भी वो खामोश क्यों हैं? उन्होंने प्रधानमंत्री से जवाब मांगा कि आखिर क्यों रिलायंस के प्रति उनका रुख नरम है? केजरीवाल ने बताया, ‘गैस की कीमत 14.25 डॉलर प्रति यूनिट करने के मामले को लेकर रिलांयस जयपाल रेड्डी से मिला लेकिन वो नहीं माने. रिलायंस ने ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स से भी मुलाकात की और वो भी नहीं माने. लेकिन प्रधानमंत्री अनिच्छुक दिखे और उन्होंने एटार्नी जनरल से राय मांगने की बात कही.’
इस प्रकरण से मुकेश अंबानी जयपाल रेड्डी से नाखुश हो गए और रेड्डी को हटा दिया गया. प्रधानमंत्री तो अर्थशास्त्री हैं तो उन्हें क्या हो रहा है इसकी भली-भांति समझ है. वो फंस गए हैं, क्योंकि उन्होंने रिलायंस को कोल आवंटन से संबंधित कागजों पर दस्तखत किए हैं. अब इन सब मामलों की लीपापोती करने के लिए उन्हें और भी कागजातों पर दस्तखत करने पड़ेंगे.
मोइली को मंत्रालय में इसलिए लाया गया है कि वो 14.25 डॉलर प्रति यूनिट पर राजी हो सकते हैं और फिर इसके बाद रिलायंस कांग्रेस को आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बड़ा फंड देगी.
'विद्रोह पर उतरे जनता'
केजरीवाल ने जनता से अपनी की कि अगर उन्हें सस्ती बिजली व गैस चाहिए, तो विद्रोह पर उतरना होगा, क्योंकि सरकार औद्योगिक घरानों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार कर रही है.