मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में संपन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश की नवीन सौर ऊर्जा नीति-2012 को मंजूरी दी गई है. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गैरपारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2006 में प्रोत्साहन नीति लागू की गई थी. इस नीति की अवधि अक्टूबर, 2011 में समाप्त हो गई है.
मंत्रिपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में मंजूरी दी गयी नई नीति में विद्युत शुल्क एवं उपकर में 10 वर्ष की छूट, तृतीय पक्ष को ऊर्जा विक्रय की स्थिति में संविदा मांग में कटौती करने की पात्रता के प्रावधान के साथ-साथ परियोजना को उद्योग का दर्जा दिए जाने, मूल्यानुसार कर (वैट) एवं एन्ट्री टैक्स में नियम अनुसार छूट तथा निजी भूमि के क्रय पर स्टाम्प ड्यूटी में 50 प्रतिशत की छूट जैसे प्रावधान शामिल हैं.
नीति के तहत 200-200 मेगावाट के 4 सौर पार्क का निर्माण किया जाएगा. निर्माण कार्य सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के अंतर्गत होगा. नीति में सौर परियोजनाओं का चयन 4 श्रेणियों में किया गया है. पहली श्रेणी में वे परियोजनाएं होंगी, जिनका चयन मध्यप्रदेश राज्य विद्युत वितरण कंपनी या एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा खुली निविदा के आधार पर किया जाएगा.
दूसरी श्रेणी में वे परियोजनाएं हैं, जिनके द्वारा विद्युत का विक्रय मुक्त उपयोग के माध्यम से राज्य के भीतर या राज्य के बाहर किया जाएगा. तीसरी श्रेणी की परियोजनाओं की स्थापना नवकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र पद्धति में किया जाएगा. चौथी श्रेणी की परियोजनाएं राष्ट्रीय जवाहरलाल नेहरू सोलर मिशन में स्थापित की जाएंगी.
परियोजनाओं की समयबद्ध स्थापना के लिए निष्पादन गारंटी जमा करवाए जाने का प्रावधान है. नीति में प्रावधानित लाभ प्राप्त करने के लिए शासकीय भूमि में स्थापित होने वाली परियोजनाओं के लिए अधिकतम क्षमता 100 मेगावाट निर्धारित की गई है. अधिकतम 3 हेक्टेयर प्रति मेगावाट शासकीय भूमि उपलब्ध करवाने का प्रावधान है. ऊर्जा नीति-2006 में पंजीकृत और ऊर्जा परियोजनाओं को इस नीति के अंतर्गत प्रत्यार्पित किए जाने का प्रावधान किया गया है.
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश उन तीन राज्य में शामिल है, जहां सौर विकिरण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. इसके कारण यहां वाणिज्यिक तौर पर सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन संभव है. प्रदेश में फिलहाल करीब 297 मेगावाट की सौर परियोजनाएं निर्मित या निर्माणाधीन हैं. देश की सबसे बड़ी एकल सौर परियोजना नीमच जिले में निर्माणाधीन है, जिसकी क्षमता 130 मेगावाट है.