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पारदी पुनर्वास मामले में मप्र सरकार को राहत

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पारदियों के पुनर्वास मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है. जबलपुर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बैतूल कलेक्टर को 16 जुलाई को पुनर्वास की अद्यतन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं.

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मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में पारदियों के पुनर्वास मामले में राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है. जबलपुर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बैतूल कलेक्टर को 16 जुलाई को पुनर्वास की अद्यतन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं.

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ज्ञात हो कि बैतूल जिले में पारदियों की बस्ती को 2007 में जला दिया गया था. इस मौके पर पारदियों पर एक महिला से कथित तौर पर छेड़छाड़ व अन्य पर पारदी महिलाओं से छेड़छाड़ के आरोप भी लगे थे. पिछले पांच वर्षों से इन पारदियों को ठिकाना नहीं मिल पाया है.

पारदियों के पुनर्वास को लेकर मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग व पारदियों के नेता अल्मस पारदी ने अलग-अलग उच्च न्यायालय ने याचिकाएं दायर की थी. न्यायालय ने 27 मार्च को सुनवाई करते हुए पारदियों के पुनर्वास में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर बैतूल को न्यायालय में उपस्थित होकर रिपोर्ट पेश करने को कहा था.

पारदी नेता के अधिवक्ता राघवेंद्र ने बताया कि कलेक्टर बैतूल बी. चंद्रशेखर ने न्यायालय के समक्ष अब तक किए गए कार्यों का ब्योरा रखा. उन्होंने बताया कि पारदी परिवारों को बीपीएल कार्ड दिए गए हैं, बच्चों को विद्यालयों में दाखिला दिया गया है, मगर बसाहट के लिए जमीन का प्रबंध नहीं हो पा रहा है, इसकी वजह आम लोगों का विरोध रही है.

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कलेक्टर बैतूल को न्यायाधीश अजीत सिंह व एस. आर. झा ने निर्देश दिए हैं कि वे 16 जुलाई को पारदी पुनर्वास की अद्यतन प्रतिवेदन प्रस्तुत करें.

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