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बलात्कार कांड: आरोपी बसपा विधायक की गिरफ्तारी के आदेश

उत्तर प्रदेश सरकार ने बसपा के निलंबित विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के विरुद्ध 17 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित बलात्कार के मामले में सीबीसीआईडी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मिल जाने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के आदेश दे दिये हैं. इस मामले में तीन और लोगों की गिरफ्तारी के भी आदेश दिए गए हैं.

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उत्तर प्रदेश सरकार ने बसपा के निलंबित विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के विरुद्ध 17 वर्षीय दलित युवती के साथ कथित बलात्कार के मामले में सीबीसीआईडी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मिल जाने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के आदेश दे दिये हैं. इस मामले में तीन और लोगों की गिरफ्तारी के भी आदेश दिए गए हैं.

प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने संवाददाताओं को बताया, ‘सीबीसीआईडी ने आज प्रदेश के पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह को द्विवेदी के विरुद्ध दलित लड़की के साथ कथित आरोप के मामले में अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है.

रिपोर्ट मिलने के बाद विधायक द्विवेदी और उनके तीन समर्थकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करके उनकी गिरफ्तारी के आदेश भी जारी कर दिये गये हैं.’ कैबिनेट सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधायक और उनके साथियों की गिरफ्तारी के आदेश जारी कर दिये हैं. उन्होंने कहा, ‘पुलिस टीमें लखनउ और बांदा के लिये रवाना हो चुकी हैं और विधायक तथा उनके साथियों को कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है.’

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सिंह ने यह भी बताया कि सीबीसीआईडी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में लड़क पर लगे चोरी के आरोप को भी सही पाया है और कहा है कि उसके पास विधायक का मोबाइल बरामद हुआ है, जिससे उसने 150 बार बात की थी. लड़की फिलहाल चोरी के आरोप में बांदा जेल में बंद है.{mospagebreak}

उन्होंने कहा, ‘लेकिन हम पुलिसकर्मियों सहित किसी को भी क्लीनचिट नहीं दे रहे हैं. विस्तृत जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ समुचित कार्रवाई की जाएगी.’
कैबिनेट सचिव ने बताया कि जांच रिपोर्ट में उभरे तथ्यों के मुताबिक लड़की पिछले साल आठ से 12 दिसम्बर तक द्विवेदी के घर में रही. उन्होंने बताया कि सीबीसीआईडी ने अपनी रिपोर्ट में लड़की के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि गत 11 तथा 12 दिसम्बर को उसके साथ अश्लील घटना हुई थी.

उन्होंने बताया कि लड़की ने अपने बयान में द्विवेदी के अलावा उनके तीन साथियों राजेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र नेता, रावण गर्ग का भी नाम लिया था. उसने गत 10 जनवरी को अतरा के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर विधायक और उनके साथियों पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए कहा था कि उसे चोरी के झूठे मामले में फंसाया गया है.

विधायक के विरुद्ध आरोप लगने के बाद मुख्यमंत्री मायावती ने पहली जनवरी को ही मामले की सीबीसीआईडी जांच के आदेश दे दिये थे और उसके अगले ही दिन आरोपी विधायक को पार्टी से निलम्बित कर दिया था. सिंह ने सवालों के जवाब में कहा ‘मुख्यमंत्री ने कहा है कि अंतिम जांच में दोषी पाए जाने पर विधायक को पार्टी से बख्रास्त कर दिया जाएगा.’{mospagebreak} सिंह ने मुख्यमंत्री के हवाले से कहा कि मामले की सीबीसीआईडी जांच के आदेश देने के बावजूद विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर ओछी राजनीति की और सरकार के खिलाफ मुद्दे तलाशने में नाकाम रहने पर विपक्षी पार्टियां सरकार पर अनर्गल आरोप लगाने लगती हैं.

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सिंह ने कहा कि जहां तक लड़की की गिरफ्तारी का सवाल है, तो उसके विरद्ध चोरी के आरोप सही हैं. उन्होंने कहा, ‘12 दिसम्बर को विधायक के घर से भागते समय वह उनकी पुत्रवधू का मोबाइल फोन और पांच हजार रुपये भी ले गयी थी. उसने उस मोबाइल फोन से 150 बार बात भी की थी.’

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय जनजाति आयोग ने विधायक के विरद्ध दलित लड़की के साथ कथित बलात्कार और उसे चोरी के आरोप में जेल भेज दिए जाने के मामले में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी थी.

बांदा जेल में राष्ट्रीय महिला आयोग की तीन सदस्यीय टीम ने भी लड़की से मुलाकात की थी जिसके बाद टीम की सदस्या सरला आर्या ने संवाददाताओं को बताया था, ‘शीलू ने महिला आयोग की टीम से जो कुछ बताया है, उससे उसके साथ अत्याचार होने तथा उसे न्याय देने में पुलिस प्रशासन की हीलाहवाली साफ दिखती है.’

आर्या ने बताया था कि शीलू ने विधायक और उनके साथियों पर उसके साथ बलात्कार करने की बात बार-बार दोहरायी थी और यह भी बताया था कि जिले के पुलिस अधीक्षक अनिल दास ने उस पर न सिर्फ अपना बयान बदलने के लिये दबाव डाला था बल्कि सादे कागजों पर उसके अंगूठे के निशान भी लगवा लिये थे.

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