यूपीए की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रणब मुखर्जी का नाम घोषित किए जाने के बाद उन्हें समर्थन देने वालों का तांता लग गया है. मौजूदा सियासी शतरंज की बिसात पर निर्णायक चालें चलने वाले मुलायम सिंह यादव ने भी आखिरकार प्रणब के नाम पर अपनी मुहर लगा दी, जिससे कांग्रेस की राह आसान हो गई.
समाजवादी पार्टी (सपा) मुखिया मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रपति पद पर कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की तरफ से घोषित प्रणब मुखर्जी की उम्मीदवारी को समर्थन देने के बारे में पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के बयान पर मुहर लगाते हुए कहा कि प्रणब, अनुभवी, योग्य, ईमानदार, और विद्वान व्यक्ति हैं.
सपा मुखिया मुलायम ने प्रणब की उम्मीदवारी पर संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘राष्ट्रपति पद पर प्रणब मुखर्जी की उम्मीदवारी के समर्थन देने के संबंध में मेरी राय वही है, जो पार्टी महासचिव रामगोपाल की है. प्रणब अनुभवी, योग्य, ईमानदार और विद्वान व्यक्ति हैं.’
तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के साथ दो दिन पहले राष्ट्रपति पद के लिये पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर अब्दुल कलाम, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के नाम प्रस्तावित करने के बारे में सवाल होने पर मुलायम सिंह यादव ने कहा, ‘हमने तीन नामों का सुझाव दिया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया.’
संप्रग द्वारा सपा तथा ममता बनर्जी द्वारा प्रस्तावित नामों को अस्वीकार किये जाने से गठबंधन पर असर के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘हमने और ममता जी ने तीन नाम सुझाये थे. उन्हें नहीं माना गया है और प्रणब मुखर्जी का नाम आमतौर पर स्वीकार किया गया है.’
यह पूछे जाने पर कि यदि तृणमूल कांग्रेस संप्रग से बाहर चली जाती है, तो क्या सपा संप्रग सरकार में शामिल हो सकती है, यादव ने इसे बेकार का सवाल बताते हुए सवाल किया, ‘हमें किसने न्यौता दिया है.’
जब मुलायम से सवाल किया गया कि सपा ने प्रणब मुखर्जी के नाम पर पहले विचार क्यों नहीं किया, तो उन्होंने कहा कि उनके पास ज्योतिष विद्या नहीं है. उन्होंने कहा, ‘आप क्या बात कर रहे हो. हमें किसने (संप्रग में शामिल होने) बुलाया है.’ इससे पहले रामगोपाल यादव ने दिल्ली में कहा था, ‘हम मुखर्जी की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं. हम उन्हें संप्रग का उम्मीदवार बनाये जाने पर बधाई देते हैं.’
मुलायम ने प्रणब को समर्थन देने की वजह के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘अभी तक हम कांग्रेस को समर्थन देते आये हैं और इस बार भी दे दिया. ऐसी बातें करना राजनीति में बेकार होता है. सियासत में घटनाक्रम तो होते रहते हैं और उनके हिसाब से निर्णय लिये जाते हैं.’
यह पूछे जाने पर कि क्या प्रणब की उम्मीदवारी को समर्थन देने के बारे में उनकी ममता से कोई बात हुई है, उन्होंने कहा, ‘जब मैं प्रणब मुखर्जी को समर्थन दे चुका हूं, तो इस सवाल का कोई मतलब नहीं है.’
बसपा प्रमुख मायावती द्वारा भी प्रणब की उम्मीदवारी को समर्थन देने के सवाल पर यादव ने तल्ख लहजे में कहा, ‘आप मुलायम सिंह की बात कीजिये. दूसरों की बात इस माहौल में बिल्कुल न करें, जहां हम बोल रहे हों.’