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बलात्कार पीड़ितों के नाम जाहिर होने पर उमर ने माफी मांगी

जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घाटी के बलात्कार पीड़ितों के नाम और उनके पते जाहिर होने की घटना पर शुक्रवार को विधानसभा में बिना शर्त माफी मांगी.

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उमर अब्दुल्ला
उमर अब्दुल्ला

विपक्ष की आलोचना का केंद्र बने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पिछले पांच साल में बलात्कार की शिकार हुई महिलाओं के नामों का खुलासा करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी.

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उमर ने विधानसभा में कहा, ‘मैं बिना शर्त माफी मांगता हूं. बलात्कार पीड़ितों के नाम जाहिर कर बहुत शर्मिन्दगी का अहसास हो रहा है.’ यह मामला विपक्ष की नेता महबूबा मुफ्ती ने उठाया. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा में पीड़ितों के नाम बता कर सरकार ने सही नहीं किया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो किया वह भारतीय दंड संहिता की धारा 228 (ए) का और मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्था का उल्लंघन है.

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माकपा विधायक मोहम्मद यूसुफ तरिगामी ने भी इस मुद्दे पर महबूबा का साथ दिया.

मुख्यमंत्री ने सदन में आश्वासन दिया कि ऐसा दोबारा नहीं होगा. उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की व्यवस्था का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए था.

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उमर ने कहा, ‘मैं इस बारे में विचार करूंगा कि किन परिस्थितियों में ऐसा हुआ और फिर सदन को जानकारी दूंगा.’ जम्मू कश्मीर सरकार ने बुधवार को राज्य की ऐसी कई महिलाओं के नाम सार्वजनिक किए थे जो बलात्कार की शिकार हुई हैं.

विधान परिषद में मुख्यमंत्री की अगुवाई में गृह मंत्रालय ने पीड़ितों के नाम और उनके पते उपलब्ध कराए थे. इस बारे में ब्यौरा विधान पाषर्द सुभाष चंद्र गुप्ता के एक सवाल के जवाब में दिया गया.
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माकपा ने राज्य सरकार की बलात्कार पीड़ितों की पहचान उजागर करने के लिए आलोचना की और कहा कि इस कदम से महिलाएं दोबारा पीड़ित हुई हैं. तरिगामी ने सरकार से कहा कि वह सदन में सभी बलात्कार पीड़ितों से माफी मांगे. उन्होंने कहा, ‘यह न केवल अनैतिक है बल्कि इसका मतलब यह है कि सरकार ने समाज में उनका मान सम्मान ही समाप्त कर दिया. सीधी बात यह है कि सरकार ने उनका जीवन दुश्वार कर दिया.’

उन्होंने कहा कि सरकार ने बलात्कार पीड़ितों के नामों का खुलासा कर न केवल सदन के सम्मान को ठेस पहुंचाई है बल्कि उच्चतम न्यायालय की भी अवमानना की है जिसने बलात्कार पीड़ितों की मौत के बाद भी उनके नामों का खुलासा करने पर प्रतिबंध लगा रखा है.

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महाधिवक्ता इशाक कादरी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपने कई फैसलों में व्यवस्था दी है कि बलात्कार पीड़ितों के नाम जाहिर नहीं किए जाने चाहिए.

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उन्होंने कहा, ‘यह न्यायपालिका के बारे में है और मैं नहीं जानता कि यह कार्यपालिका में लागू होता है या नहीं.’ सदन में दिए गए ब्यौरे के अनुसार, राज्य में बलात्कार के सर्वाधिक मामले जम्मू और श्रीनगर में हुए. जम्मू में वर्ष 2006 से बलात्कार के 150 मामले और श्रीनगर में 120 मामले हुए.

राज्य में वर्ष 2006 के बाद से बलात्कार के कुल 1,326 मामले दर्ज किए गए. जवाब में सरकार ने कहा है कि बीते पांच साल में केवल एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया.

बलात्कार के ज्यादातर मामले या तो अदालतों में है या उनकी जांच चल रही है.

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