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राजोआना की दया याचिका पर सुनवाई से SC का इनकार

उच्चतम न्यायालय ने बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, जिसे पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए फांसी की सजा सुनायी गई है.

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उच्चतम न्यायालय
उच्चतम न्यायालय

उच्चतम न्यायालय ने बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर कोई भी आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, जिसे पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के लिए फांसी की सजा सुनायी गई है.

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न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्र की एक पीठ ने कहा कि वह कोई भी निर्देश पारित नहीं कर सकती, क्योंकि दोषी ने उसके समक्ष कोई याचिका दायर नहीं की है और याचिकाकर्ता अभिनव रामकृष्ण को उसकी ओर से निवेदन करने का अधिकार नहीं है.

न्यायालय ने साथ ही एक गैरसरकारी संगठन, ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल के वकीलों को इजाजत दी कि वे ऐसे ही अनुरोध वाली अपनी याचिका वापस ले लें.

पीठ ने वकील अभिनव रामकृष्ण से कहा कि चूंकि याचिका अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गई है इसकी सुनवायी नहीं की जा सकती क्योंकि किसी भी तरह से याचिकाकर्ता के किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है.

अन्य शब्दों में पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 32 का इस्तेमाल उस व्यक्ति द्वारा ही किया जा सकता है जिसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है.

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गैर सरकारी संगठन ने अपनी याचिका में कहा था कि सुनवायी के दौरान राजोआना का ठीक तरह से पक्ष नहीं रखा गया और उसने निचली अदालत की ओर से सुनायी गई फांसी की सजा के खिलाफ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कोई अपील दायर नहीं की है.

गैरसरकारी संगठन, राजोआणा की फांसी की उस सजा पर रोक की मांग कर रहा था जो 31 मार्च को तय थी लेकिन केंद्र ने इस पर पहले ही रोक लगा दी है. राजोआणा फिलहाल पटियाला केंद्रीय जेल में बंद है. गैरसरकारी संगठन ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने राजोआना को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाये जाने वाले निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया था.

उसने कहा था कि इस मामले में निर्णय अंतिम नहीं है क्योंकि सीबीआई ने सहआरोपी जगतार सिंह हवारा की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदले जाने को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है.

गैरसरकारी संगठन ने अपनी याचिका में कहा, ‘यह कहा जाता है कि फांसी की सजा की जिस आदेश से पुष्टि हुई है वह उच्चतम न्यायालय में सीबीआई की ओर से दायर याचिका के दायरे में है.’

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याचिका में कहा गया है, ‘हवारा के दोषी करार दिये जाने के खिलाफ अपील में विशेष अनुमति प्रदान की गई है, इसलिए निर्णय अंतिम नहीं है इसलिए फांसी की सजा नहीं दी जा सकती.’

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