तमिलनाडु में बुधवार को एक भीषणतम अग्निकांड में 36 व्यक्तियों की जलने से मौत हो गई, जबकि 50 अन्य घायल हुए. निकटवर्ती मुधालीपट्टी में एक पटाखा फैक्ट्री परिसर में लगी आग ने फैक्ट्री और परिसर के 48 शेड को तबाह कर दिया.
पुलिस और दमकल सूत्रों ने बताया कि हादसा उस समय हुआ जब फैक्ट्री में काम करने वाले लोग रंगबिरंगी रौशनी निकालने वाली आतिशबाजी बनाने के लिए रसायनों को मिलाने का काम कर रहे थे.
आग लगने से बहुत से मजदूर भीतर फंस गए. आम तौर पर शांत रहने वाले इस गांव में पटाखा फैक्ट्री में लगी आग से हर ओर अफरा तफरी मच गई. रह रहकर उठती धमाकों की आवाज करीब दो किलोमीटर के दायरे में सुनाई देती रही.
घना धुआं पूरे इलाके पर फैल गया और आग में फंसे लोग इतनी बुरी तरह जल गए कि उनकी पहचान तक होना मुश्किल है. हादसे में हताहत हुए लोगों में ज्यादातर फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर हैं. पुलिस ने बताया कि एक दुखद बात यह हुई कि आग में घिरे लोगों को बचाने के लिए ओमशक्ति फैक्ट्री परिसर के भीतर घुसे कुछ लोग भी आग के शिकार हो गए.
सूत्रों ने बताया कि सरकारी परामर्श का उल्लंघन करते हुए सारे पटाखों को एक ही गोदाम में रखा गया था. दमकल कर्मचारियों को राहत कार्य के लिए जरूरी सामान न होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
उनके पास इस तरह की भीषण आग के खिलाफ अभियान चलाने के लिए मास्क जैसे जरूरी उपकरणों का अभाव था. उन्होंने चार घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. परिसर के घने धुएं में न घुस पाने के कारण राहत और बचाव कार्य प्रभावित हुआ.
श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट्री का मालिक फरार है और उसने इस सलाह की तरफ ध्यान नहीं दिया कि रसायनों के भंडार को एक ही जगह पर न रखे. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लोग धधकती लपटों से घिरे चीख रहे थे.
कई घायलों को मोटरबाइक, चारपाई और कंधों पर लादकर राहतकर्मियों ने अस्पताल पहुंचाया. अधिकारियों ने बताया कि फैक्ट्री में काम करने वाले ज्यादातर मजदूर अकुशल थे और कुछ पश्चिम बंगाल के थे, जिन्हें तमिल भाषा नहीं आती थी, जिसकी वजह से वह बाकी लोगों को आग लगने की बारे में बता नहीं पाए.
विरुद्धनगर जिले के पुलिस अधीक्षक नजमुल होडा ने बताया कि देश में बनने वाले कुल पटाखों में 90 प्रतिशत सिवकाशी में बनाए जाते हैं. दीपावली उत्सव सिर पर होने के कारण पटाखे बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा था.
फैक्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि हादसे के वक्त इकाई में 300 लोग काम कर रहे थे. हादसे के बाद फैक्ट्री के बाहर हजारों लोग जमा हो गए, जो फैक्ट्री में काम करने वाले अपने सगे संबंधियों की खैर खबर जानने के लिए उत्सुक थे.
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने मरने वालों के परिजन को दो-दो लाख रुपए देने का ऐलान किया और राहत कार्यों पर नजर रखने के लिए पांच मंत्रियों के एक दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया.
अक्टूबर 2009 में तिरुवल्लूर जिले में पल्लीपट्टू में पटाखों के एक गोदाम में आग लगने से 32 लोगों की मौत हो गई थी. इनमें ज्यादातर लोग दीपावली की खरीदारी करने निकले थे.
वरिष्ठ मंत्री ओ पनीरसेवलम और उनके चार अन्य सहयोगी राहत अभियानों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल पर भेजे गए हैं. सिवकाशी में पटाखा बनाने की करीब 450 फैक्ट्री हैं, जहां तकरीबन 40,000 लोग काम करते हैं.
एक लाख से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं और यहां का वाषिर्क कारोबार 800 से 1000 करोड़ रुपये का है. मंत्री पनीरसेवलम और अन्य लोग जब सिवकाशी में घायलों को देखने अस्पताल पहुंचे तो हादसे के शिकार लोगों के परिजन ने उनका घेराव किया.
ये लोग अस्पताल में अपर्याप्त सुविधाओं और दवाओं की कमी की शिकायत कर रहे थे. पुलिस ने बताया कि एक अन्य घटनाक्रम में पटाखा इकाई के फोरमैन को हादसे के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया.
कंट्रोलर ऑफ एक्सप्लोसिव्स के एक अधिकारी रोहित शर्मा ने घटनास्थल का दौरा किया. उन्होंने बताया कि जब रसायनों को मिलाया जाता है तो उस दौरान हादसा होने की आशंका रहती है.
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि हवा में उड़ जाने वाले रसायनों को स्टोर रूम में रखा जाना चाहिए, लेकिन यहां उन्हें शेड में रखा गया था, जिससे आग लग गई. उन्होंने बताया कि जिस जगह आग लगी वह 300 मजदूरों के काम करने के लिए पर्याप्त नहीं थी शायद इसलिए हताहतों की संख्या इतनी अधिक रही.