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भूकंप से अब तक 119 की मौत, भूस्खलन और बारिश से बचाव कार्यों में बाधा

भूकंप के बाद भूस्खलन और भारी बारिश से जूझ रहे सिक्किम में बचाव कार्यों में खासी बाधा आ रही है. कल शाम रिक्टर स्केल पर आए 6.9 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 119 हो गई है, जिनमें से अकेले सिक्किम में यह संख्या 80 है.

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भूकंप के बाद भूस्खलन और भारी बारिश से जूझ रहे सिक्किम में बचाव कार्यों में खासी बाधा आ रही है. कल शाम रिक्टर स्केल पर आए 6.9 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़ कर 119 हो गई है, जिनमें से अकेले सिक्किम में यह संख्या 80 है.

तस्‍वीरों में देखें देश के उत्तर-पूर्वी हिस्सो में भूकंप के झटके

रविवार शाम यहां आया भूकंप अपने पीछे बर्बादी का मंजर छोड़ गया है. इस प्राकृतिक आपदा के कारण सड़कों, इमारतों और दूसरे ढांचों को काफी नुकसान पहुंचा है, मोबाइल फोन टावर उखड़ गए हैं और दूरसंचार व्यवस्था ठप हो गई है. भूकंप से भयभीत बहुत से लोगों ने रात खुले आसमान के नीचे बिताई.

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मृतकों की संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है. केंद्रीय गृह सचिव आर के सिंह ने बताया कि अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि लोग अब भी ढहे हुए मकानों के मलबे में फंसे हो सकते हैं. राहत और बचाव दलों को गांवों तक पहुंचने में अब भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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जिन इलाकों में बचाव दल नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां विमानों से खाद्य सामग्री के पैकेट गिराए गए.

सिंह ने बताया कि चिकित्सकों के दो दल आज हेलीकॉप्टरों की मदद से सर्वाधिक प्रभावित मंगन और संगथन पहुंचे. सीमा सड़क संगठन के जवानों ने सिक्किम के राष्ट्रीय राजमार्ग 31 ए पर यातायात बहाल कर दिया है. जीओसी 17 माउंटेन डिवीजन के मेजर जनरल एस एल नरसिम्हन ने संवाददाताओं को बताया कि सेना भूस्खलन और खराब मौसम के कारण दोपहर तक सिक्किम के पश्चिम और दक्षिण जिले तक नहीं पहुंच पा रही थी.

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जिला नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप से अकेले सिक्किम में 80 लोगों की मौत हुई है . इनमें से सबसे ज्यादा लोग उत्तरी जिले और तीस्ता नदी के किनारे बसे रांग्पो, दिक्चू, सिंगतम और चुंगथांग गांवों के हैं.

सिंह ने बताया कि तीस्ता हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के 10 कर्मचारियों के शव सिंगथम में मलबे से बरामद हो गए हैं.

मृतक संख्या बढ़कर 119 हो गयी है जिसमें से 12 मौतें पश्चिम बंगाल में, 9 बिहार में 11 नेपाल में और तिब्बत में 7 लोगों की मौत हुई है. सौ से अधिक लोग घायल भी हुए हैं.

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उत्तरी सिक्कम में कल शाम एक बस में यात्रा कर रहे 22 लोग लापता हो गये. 17वीं माउंटेन डिवीजन के एक प्रवक्ता ने कहा कि सेना अब भी लापता बस का पता नहीं लगा पायी है. यह बस मंगन और चुंगथंग के बीच 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में कहीं हो सकती है. भूकंप से डरे लोगों ने रात बारिश और सर्दी के बीच भी खुले आसमान के नीचे बिताई. सेना ने 2,000 और आईटीबीपी ने 400 लोगों के लिए राहत शिविर खोले हैं.

गृह सचिव ने बताया, ‘अभियान में सेना के 5,500 और आईटीबीपी के 700 जवान जुटे हुए हैं. बीआरओ ने दोपहर गंगटोक और सिलीगुड़ी के बीच का राजमार्ग खोल कर प्रशंसनीय कार्य किया.’ उन्होंने कहा कि सिक्किम उर्जा आयोग ने आंशिक तौर पर बिजली बहाल कर दी है और प्रदेश में लैंडलाइन टेलीफोन की सुविधा भी काम करने लगी है. नौ हेलीकॉप्टर राहत और बचाव कार्यों में लगे हैं.

आईटीबीपी ने बताया कि उत्तरी सिक्किम के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से लगभग 400 लोगों को बचा लिया गया है. कई अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों समेत 26 पर्यटकों को सर्वाधिक प्रभावित पेंगोंग से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है.

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वहीं न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एस कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘भूकंप का देश के किसी भी परमाणु संयंत्र पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.’

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