मुंबई में 26/11 हमलों के दोषी कसाब के मामले में सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे महाराष्ट्र के अधिवक्ता उज्जवल निकम ने कहा है कि देश में फांसी के मामलों में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद उस पर एक निश्चत समयावधि में अमल होना चाहिये. एक कार्यक्रम में यहां भाग लेने आये निकम ने कहा कि राष्ट्रपति के पास भेजी जाने वाली क्षमा याचिका का निपटारा भी तय समयावधि में होना चाहिये.
एक सावाल के जवाब में निकम ने फांसी के मामलों में हो रही देर पर न्यायिक व्यवस्था में सुधार को जरूरी करार दिया. उन्होंने कहा कि फांसी की सजा पाये अभियुक्तों की क्षमा याचिका का राष्ट्रपति के पास तीन महीने में निराकरण हो जाना चाहिये. अगर इस अवधि में निराकरण नहीं होता है, तो अभियुक्त को न्यायालय के फैसले के अनुसार सजा देनी चाहिये. निकम मुंबई हमले के बाद पकडे गये पाकिस्तानी आतंकवादी आमिर अजमल कसाब के खिलाफ सरकार की तरफ से पैरवी कर सुखिर्यों में आये थे. उन्होंने कसाब को पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का एक जीता जागता उदाहरण करार दिया है.
उनके मुताबिक इसीलिए कसाब की सुरक्षा व्यवस्था कडी रखी गयी है. उन्होंने बताया कि कसाब के मामले में निचली अदालत में सुनवाई की सभी प्रक्रिया पूरी हो गयी है. उन्होंने कहा कि बुधवार को महाराष्ट्र उच्च न्यायालय में शीतकालीन अवकाश खत्म हो रहा है और उसमें कसाब हमले में सहयोगी रहे आरोपियों के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की जायेगी.
इस याचिका पर अगले दो तीन माह में सुनवाई पूर्ण हो जायेगी. निकम लोणी गांव में गुर्जर समाज के अध्यक्ष दत्तात्रय महाजन के निवास पर आयोजित विवाह समारोह में शिरकत करने आये थे. इस अवसर पर उनकी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये थे.