असम एक मात्र ऐसा राज्य है, जहां नई विधानसभा कैसी होगी, इसके साफ रुझान नहीं मिल रहे हैं. सर्वे के मुताबिक वहां किसी को बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. असम की जनता इसबार किसकी सरकार बनाएगी.
आजतक-इंडिया टुडे-मेल टुडे-ओआरजी ओपिनियन पोल ने पब्लिक का मन टटोला तो त्रिशंकु विधानसभा की तस्वीर उभर कर आई. सर्वे के मुताबिक 126 में से 46 सीटें कांग्रेस को मिल सकती हैं, जबकि एजीपी-बीजेपी गठबंधन के खाते में 53 सीटें जा सकती हैं. यानी बहुमत के लिए जरूरी 64 का आंकड़ा दोनों में से किसी के पास नहीं दिखाई पड़ता है.
पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 53 सीटें मिली थीं जोकि इस बार की अनुमानित सीटों से ज्यादा है. इसके उलट 24 सीटें जीतने वाली एजीपी और 10 सीटों वाली बीजेपी का गठबंधन इस बार फायदे में दिखाई पड़ रहा है. बेहतर सीएम के सवाल पर असम के 37.5 फीसदी लोगों ने तरुण गोगोई का नाम लिया, जबकि पीके मोहंता को 13.8 और वृंदावन गोस्वामी को 16.4 फीसदी लोग अपना पसंदीदा मुख्यमंत्री बताते हैं. {mospagebreak}
मुद्दों की लिस्ट में सबसे ऊपर महंगाई है, जिसे असम के 85.6 फीसदी लोग वोटिंग के वक्त ध्यान में रखेंगे जबकि 13 फीसदी लोगों का कहना है महंगाई कोई मुद्दा नहीं है. इसी तरह भ्रष्टाचार के मुद्दे को करीब 61 फीसदी लोग अहम मानते हैं और 37 फीसदी लोग इससे इत्तफाक नहीं रखते. राज्य के 73.8 फीसदी लोगों का कहना है कि बिजली-पानी और सड़क का मुद्दा इस चुनाव में महत्वपूर्ण होगा, जबकि 23.8 फीसदी लोग इसे कोई मुद्दा नहीं मानते.
बेरोजगारी को चुनावी मुद्दा मानने वाले वोटर करीब 72.8 फीसदी हैं, जबकि 22 फीसदी लोगों के लिए बेरोजगारी कोई मुद्दा है ही नहीं. सर्वे के दौरान असम के लोगों से पूछा गया कि वोट देते समय अवैध प्रवासियों के मुद्दे को वे कितनी अहमियत देते हैं. केंद्र सरकार ने उल्फा के साथ जो बातचीत शुरू की है, क्या उसका कोई फायदा होगा, सर्वे में एक सवाल ये भी था. सर्वे में लोगों से पूछा गया कि क्या उन्हें ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार असम और नॉर्थ-ईस्ट की अनदेखी करती है.