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यूपी सरकार ने किया सीआरपीसी में संशोधन का प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश सरकार ने बलात्कार के मामलों के शीघ्र निस्तारण और ऐसे मामलों में जमानत के नियमों को सख्त बनाने के लिये दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन का प्रस्ताव किया है.

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मायावती
मायावती

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उत्तर प्रदेश सरकार ने बलात्कार के मामलों के शीघ्र निस्तारण और ऐसे मामलों में जमानत के नियमों को सख्त बनाने के लिये दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन का प्रस्ताव किया है.

राज्य विधानसभा में आज पेश किये गए दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तर प्रदेश द्वितीय संशोधन) विधेयक में न्यायिक परीक्षण तथा जमानत सम्बन्धी कुछ नई धाराएं और उपधाराएं प्रस्तावित की गई हैं.

प्रस्तावित विधेयक में एक धारा प्रस्तावित की गई है जिसके तहत सम्बन्धित न्यायाधीश को बलात्कार के मामले को भारतीय दंड विधान की धारा 376 के तहत छह महीने के अंदर निस्तारित करना होगा.

एक अन्य उप धारा का प्रस्ताव भी किया गया है जिसमें कहा गया है कि बलात्कार के आरोप का पर्याप्त आधार होने पर आरोपित को जमानत नहीं मिलेगी. विधेयक में कहा गया है कि ऐसे मामलों में सजा की अवधि सात साल से कम नहीं होगी और इसमें उम्रकैद भी हो सकती है.

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प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार या फिर आत्मसमर्पण करने वाले व्यक्ति को सिर्फ आधारों पर जमानत दी जा सकेगी. इनमें से पहले आधार के तहत उच्च न्यायालय और सत्र न्यायालय समेत अदालत को संतुष्ट करना होगा कि आरोपी किसी अपराध में दोषी नहीं है. दूसरा, आरोपी 16 साल से कम उम्र का हो, बीमार हो या फिर अक्षम हो.

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