पाकिस्तानी आतंकवादी अजमल कसाब ने मुंबई हमलों के दौरान छत्रपति शिवाजी रेलवे टर्मिनस :सीएसटी: पर हुए हमले में अपनी भूमिका से इंकार करते हुए आज बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि पुलिस ने उसे इस अपराध में फंसाने के लिये मनगढ़ंत कहानी तैयार की.
बचाव पक्ष के वकील अमीन सोलकर, फरहाना शाह और संतोष देशपांडे ने अभियोजन पक्ष के मामले में खामी खोजकर और गवाहों के बयान में विरोधाभासों का जिक्र करते हुए दलील दी कि कसाब उस वक्त सीएसटी पर मौजूद नहीं था, जब यह घटना हुई थी.
उन्होंने न्यायमूर्ति रंजना देसाई और आरवी मोरे को बताया, ‘‘हम इस घटना को खारिज नहीं कर रहे हैं, हम इस बात का भी प्रतिवाद नहीं कर रहे हैं कि दो आतंकवादियों ने लोगों पर गोलीबारी की..हम यह कह रहे हैं कसाब उस वक्त सीएसटी पर मौजूद नहीं था.’’ गौरतलब है कि यह दोनों न्यायाधीश कसाब को मिली मौत की सजा की पुष्टि पर दलील सुन रहे हैं.
कसाब अदालत में लगाई गई वीडियो कांफ्रेंसिंग की स्क्रीन पर पेश नहीं हुआ. उसे अदालत की कार्यवाही सुनाने के लिये यह व्यवस्था की गई है. सोलकर ने गुजारिश की कि न्यायधीश व्यक्तिगत रूप से घटनास्थल का दौरा करें, ताकि उन्हें ‘स्थलाकृति’ के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी मिल सके. साथ ही, इससे कसाब के खिलाफ अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किये गये सबूत का समर्थन हो सकेगा.
न्यायाधीशों ने कहा कि वे घटनास्थल पर जाने को तैयार हैं और इसके लिये अगले हफ्ते एक तारीख तय करेंगे.
गौरतलब है कि वरिष्ठ सत्र न्यायाधीश एमएल तहलियानी सुनवाई से पहले घटनास्थल का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने कसाब को मौत की सजा सुनाई थी.