बीजेपी की तीन बार की महिला विधायक माया कोडनानी नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री थीं. माया कोडनानी पहली महिला वर्तमान विधायक हैं जिन्हें गोधरा दंगों के बाद सजा हुई है.
नरोदा पाटिया दंगा मामले में माया कोडनानी पर आरोप था कि माया ने दंगाई भीड़ का नेतृत्व किया था. माया का परिवार बटवारे से पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहता था लेकिन बाद में परिवार गुजरात आकर बस गया.
माया कोडनानी पेशे से गाइनकालजिस्ट हैं. हालांकि माया डॉक्टर के तौर पर ही कम और आरएसएस की कार्यकर्ता के तौर पर ज्यादा जानी जाती थीं.
नरोदा में उनका अपना मटर्निटी अस्पताल था लेकिन फिर वो स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो गईं. वह अपनी भाषण की वजह से भाजपा में काफी लोकप्रिय थीं. बताया जाता है कि वह बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के भी करीबी थीं.
माया कोडनानी दंगा के समय नरोदा से विधायक थीं. 2002 के गुजरात दंगों में उनका नाम सामने आया. 2002 में ही हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में वे फिर से विधायक चुनी गईं. 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी माया कोडनानी की जीत हुई. इसके बाद वह गुजरात सरकार में मंत्री बन गईं.
पर 2009 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष टीम से गिरफ्तारी के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. हालांकि जल्द ही वे जमानत पर रिहा भी हो गईं. इस दौरान वे विधानसभा जाती रहीं और उन पर नरोदा पाटिया दंगा मामले में मुकदमा भी चलता रहा.
29 अगस्त 2012 में आखिरकर कोर्ट ने उन्हें नरोदा पाटिया दंगों के मामले में दोषी करार दिया. 31 अगस्त को कोर्ट ने उन्हें 28 वर्ष की सजा सुनाई.