राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की भारत यात्रा से उनके साथ पाकिस्तानी जेल में बंद रहे महबूब इलाही बेहद खुश हैं. लेकिन इलाही को इस बात का मलाल है कि जरदारी की संक्षिप्त यात्रा के कारण वह उनसे मुलाकात नहीं कर सके. इलाही ने पाकिस्तान के उच्चायोग को पत्र लिखकर रविवार को भारत आ रहे जरदारी से मिलने का समय मांगा था लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी.
भारत के पूर्व जासूस इलाही 1986-87 के दौरान कराची जेल में जरदारी के साथ कुछ महीने बीता चुके हैं. पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में इलाही 20 वर्ष की सजा काट चुके हैं. इलाही ने इंटरव्यू में कहा, 'पाकिस्तान में जिया उल हक के सैन्य शासन के दौरान मैं जरदारी एवं बेनजीर भुट्टो के साथ एक ही जेल में सजा काट रहा था. हम अक्सर जेल प्रांगण में जरदारी से मुलाकात करते थे. जरदारी की जेल में अच्छी छवि थी.' इलाही 60 एवं 70 के दशक के दौरान पाकिस्तान में जासूसी कर चुके हैं.
उन्होंने बताया, 'वह पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति और जिया के कुशासन एवं दमन की चर्चा करते थे.' इलाही ने बताया कि जरदारी भारतीय कैदियों से सहानुभूति रखते थे. उन्होंने कहा, 'जरदारी को भारतीय युद्धबंदियों के प्रति सहानुभूति थी.'
52 वर्षीय इलाही पाकिस्तानी जेल में भारतीय कैदियों के साथ अमानवीय व्यवहार को याद करते हुए सिहर उठते हैं. उनके शरीर पर बने निशान उस जुल्म की गवाही दे रहे हैं. इलाही ने कहा कि पाकिस्तान जेल में 20 साल के दौरान उन्होंने सैकड़ों भारतीय युद्धबंदियों को देखा. उन्होंने कहा, 'मैं सैकड़ों भारतीय कैदियों से मिला जिसमें अधिकतर युद्धबंदी थे. शारीरिक प्रताड़ना के कारण कई कैदियों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया.'
इस पूर्व भारतीय जासूस को इस बात का दुख है कि न तो भारत सरकार और न ही भारतीय सेना युद्धबंदियों को वापस लाने की कोशिश कर रही है. इलाही 1996 में पाकिस्तान की जेल से छूटने के बाद भारतीय कैदियों एवं युद्धबंदियों की रिहाई के लिए अभियान चला रहे हैं. इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबधन सरकार के कार्यकाल में संसद भवन के समक्ष आत्मदाह की धमकी तक दी थी.