वायुसेना की लगातार घटती ताकत की वजह से सरकार आलोचना झेल रही है. खासतौर से हाल में राफेल विमान विवाद के बीच सरकार की कोशिश है कि वायुसेना की ताकत को बढ़ाया जाए. आजतक को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, मार्च 2019 से चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टर भारत आना शुरू हो जाएंगे और वायुसेना के बेड़े को नई ताकत मिलेगी.
अपाचे भारतीय वायुसेना के मौजूदा MI 25 और 35 की जगह लेंगे. हेवीलिफ्ट चिनूक पुराने पड़ चुके MI 26 की जगह लेंगे. वायुसेना के चार पायलट और चार इंजीनियर अमेरिका के डिलेवर में चिनूक हेलीकॉप्टर को चलाने की ट्रेनिंग कर रहे हैं.
अमेरिका से 15 चिनूक और 22 अपाचे हेलीकॉप्टर खरीदने के सौदे को भारत ने मंजूरी दे दी थी. पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान करीब 19500 करोड़ रुपए के इस सौदे पर हस्ताक्षर हुए थे.
अपाचे हेलीकॉप्टर की खासियतें
- 16 फुट ऊंचे और 18 फुट चौड़े अपाचे हेलीकॉप्टर को उड़ाने के लिए दो पायलट होना जरूरी है.
- अपाचे हेलीकॉप्टर के बड़े विंग को चलाने के लिए दो इंजन होते हैं. इस वजह से इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा है.
- अपाचे हेलीकॉप्टर 280 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकता है.
- इस हेलीकॉप्टर का डिजाइन ऐसा है कि इसे रडार की मदद से पकड़ना मुश्किल होता है.
- एक बार में लगातार तीन घंटे तक उड़ान भर सकता है.
- 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता से लैस हेलीकॉप्टर के नीचे लगी राइफल में एक बार में 30 MM की 1,200 गोलियां भरी जा सकती हैं.
चिनूक हेलीकॉप्टर की खासियतें
- पहले चिनूक ने 1962 में उड़ान भरी थी. यह एक मल्टीमिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है.
- चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना की खास ताकत है. इसी चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था. वियतनाम से लेकर इराक के युद्धों तक शामिल चिनूक दो रोटर वाला हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर है.
- भारत जिस चिनूक को खरीद रहा है, उसका नाम है सीएच-47 एफ है.
- यह 9.6 टन वजन उठा सकता है, जिससे भारी मशीनरी, तोप और बख्तरबंद गाड़ियां लाने-ले जाने में सक्षम है.