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ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण

भारत ने 290 किलोमीटर तक की मारक क्षमता से लैस ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक उन्नत संस्करण का मंगलवार को ओडिशा तट पर सफल परीक्षण किया.

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ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

भारत ने 290 किलोमीटर तक की मारक क्षमता से लैस ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक उन्नत संस्करण का मंगलवार को ओडिशा तट पर सफल परीक्षण किया. इस परीक्षण से भारत को ऐसी क्षमता हासिल हो गई है जिससे वह पर्वतों या इमारतों के समूह में छुपे दुश्मनों पर बेहद सटीक निशाना साध सकता है.

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ब्रह्मोस के प्रमुख ए शिवतनु पिल्लई ने बताया कि मिसाइल ने अपने कृत्रिम निशाने को भेदने के लिए करीब 500 सेकंड में 290 किलोमीटर की अपनी रेंज का सफर तय किया. उसे यहां से करीब 15 किलोमीटर दूर चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से दागा गया था.

सटीक निशाना लगाने की मिसाइल की बढ़ी हुई क्षमता के बारे में बताते हुए पिल्लई ने कहा, 'नए सॉफ्टवेयर एल्गोरिदम से लैस और भारतीय वैज्ञानिकों एवं उद्योगों द्वारा देश में ही विकसित गगन प्रणाली सहित कई नौवहन उपग्रहों को जोड़ने वाली अत्याधुनिक निर्देशन प्रणाली से पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाले युद्ध में जमीन पर छुपे हुए लक्ष्यों के खिलाफ ज्यादा सटीक हमला करने की क्षमता हासिल हुई है.'

प्रक्षेपण स्थल पर मौजूद एवं परीक्षण प्रक्रिया में शामिल ब्रह्मोस एवं डीआरडीओ के अधिकारियों ने कहा था कि पहले मिसाइल अपने निशाने से करीब 10 मीटर तक भटक सकती थी पर अब नई प्रणाली इसके भटकाव को पांच मीटर तक कम कर देगी जिससे पर्वतीय युद्ध की स्थिति में यह और ज्यादा मारक क्षमता वाली साबित होगी.

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डीआरडीओ ने कहा कि चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्टिंग रेंज से सुबह करीब 10:40 बजे मोबाइल लॉन्‍चर के जरिए मिसाइल को दागा गया । मिसाइल अपने साथ 300 किलोग्राम पारंपरिक आयुध ले जाने में सक्षम है.  डीआरडीओ के जनसंपर्क निदेशालय के निदेशक और वरिष्ठ रक्षा वैज्ञानिक रवि कुमार गुप्ता ने कहा, 'यह ब्रह्मोस का विकासात्मक परीक्षण था.' इस दो चरण वाली मिसाइल को पहले ही सेना और नौसेना में शामिल किया जा चुका है तथा वायुसेना का संस्करण परीक्षण के आखिरी दौर में है.

भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस के मिसाइल का यह 44वां परीक्षण था. साल 2005 में भारतीय नौसेना में ब्रह्मोस प्रणाली के पहले संस्करण को शामिल किए जाने के बाद अब यह सेना की दो रेजीमेंट में भी पूरी तरह से परिचालित है. यह मिसाइल आईएनएस राजपूत पर तैनात की गई थी.

सेना अब तक अपने तीन रेजीमेंट में ब्रह्मोस को शामिल करने का ऑर्डर दे चुकी है. दो रेजीमेंट में पहले ही यह परिचालित हो रही है. रक्षा मंत्रालय ने सेना को अपनी तीसरी रेजीमेंट में भी इस मिसाइल को शामिल करने की इजाजत दे दी है. यह अरुणाचल प्रदेश में तैनात होगी.

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