संसद पर हमला मामले में दोषी ठहराए गए अफजल गुरू ने उच्चतम न्यायालय में आवेदन कर अपने मुकदमे के जल्द निबटारे का अनुरोध किया है. अफजल को संसद पर हमला मामले में मौत की सजा सुनाई गई है और उसकी दया याचिका काफी समय से लंबित है.
उसने अपने आवदेन में कहा कि जेल में अलग रखा जाना मौत से भी बदतर है. अफजल ने मार्च में आवदेन करते हुए उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया था कि उसकी दया याचिका पर जल्दी फैसला किया जाए. उल्लेखनीय है कि उसकी दया याचिका पिछले चार साल से सरकार के पास लंबित है.
अफजल के वकील एन डी पंचोली ने कहा कि तिहाड़ जेल में पिछले हफ्ते आखिरी मुलाकात के दौरान अभियुक्त ने उनसे कहा था कि वह ‘जिस स्थिति का सामना कर रहा है, वह मौत से भी बदतर है.’ पंचोली ने कहा कि अफजल ने कहा कि वह जेल में अकेले रहते रहते और दया याचिका में देरी से उब गया है. उन्होंने कहा कि अफजल ने मार्च में जेल अधिकारियों के जरिए अपना आवेदन भेजा.
इसके पूर्व उसने जनवरी में याचिका भेजी थी जिसे यह कहते हुए लौटा दिया गया था कि वह सही प्रक्रिया अपनाएं. पंचोली ने कहा, ‘अफजल की दलील है कि उसे मौत की सजा सुनायी गयी है न कि जेल में अकेले रखे जाने की. उसने कहा कि इस देरी से उसे मदद नहीं मिल रही और इस मामले में जल्द से जल्द कोई फैसला हो.’ उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल फैसले में देरी से काफी परेशान है.
पंचोली ने कहा, ‘वह कह रहा है कि उसके लिए अच्छा है कि उसे फांसी पर लटका दिया जाए. वह कह रहा है कि वह फांसी चाहता है और इसके लिए तैयार है. जेल में अलग रखे जाने से वह परेशान है.’ अफजल ने यह भी अनुरोध किया है कि उसे जम्मू-कश्मीर के किसी जेल में स्थानांतरित कर दिया जाए ताकि उसके परिवार के लोग उससे मिल सकें. पिछले दिनों अफजल की दया याचिका पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार की प्रतिक्रिया जानने के लिए 16वीं बार स्मरणपत्र भेजा था.