एयरसेल-मैक्सिस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम से पहली बार पूछताछ की. वरिष्ठ कांग्रेस नेता जब वित्त मंत्री थे तो प्रवर्तन निदेशालय उनके अधीन ही आता था. इसी एजेंसी ने उनसे छह घंटे से भी अधिक समय तक पूछताछ की.
निदेशालय ने कल ही चिदंबरम को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने के लिये नया समन भेजा था. एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (पीएमएलए) के तहत चिदंबरम का बयान दर्ज किया. उनसे एयरसेल-मैक्सिस सौदे को मंजूरी देते समय तत्कालीन विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में भी सवाल किए गए.
एयरसेल-मैक्सिस सौदे मामले में निदेशालय चिदंबरम के बेटे कार्ति से पहले ही पूछताछ कर चुका है. निदेशालय के कार्यालय से निकलते ही चिदंबरम ने ट्वीट किया कि उन्होंने जांच एजेंसी को जो भी बयान दर्ज कराया वह सरकारी दस्तावेजों में पहले ही दर्ज है. इसके साथ ही चिदंबरम ने कहा कि कोई एफआईआर नहीं होने के बावजूद जांच शुरू कर दी गई है.
उन्होंने लिखा है, 'आधे से अधिक समय तो बिना किसी गलती के जवाब टाइप करने, बयान पढ़ने व इस पर हस्ताक्षर करने में बीता.' संप्रग शासन काल में वित्त एवं गृह मंत्री रहे चिदंबरम आज सुबह 10.58 बजे एजेंसी मुख्यालय पहुंचे. उनके साथ एक वकील भी था. हालांकि, इस दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एजेंसी मुख्यालय परिसर के आसपास पुलिस, सीआरपीएफ जवानों का पहरा लगा हुआ था.
अधिकारियों ने बताया कि दो घंटे से अधिक की पूछताछ के बाद चिदंबरम को डेढ बजे के आसपास भोजन के लिए जाने की अनुमति दी गई. पूछताछ लगभग 3.30 बजे दुबारा शुरू हुई जो सात बजे तक चली. एजेंसी चिदंबरम को फिर बुला सकती है.
चिदंबरम ने इससे पहले पिछले सप्ताह विशेष सुनवाई अदालत के न्यायधीश ओ पी सैनी की अदालत में गिरफ्तारी की कार्रवाई से बचने के लिये अग्रिम अर्जी दाखिल की थी. अदालत ने आज ही एक आदेश में ईडी को 10 जुलाई तक चिदंबरम की गिरफ्तारी अथवा उनके खिलाफ किसी तरह की उत्पीड़क कार्रवाई से रोक दिया है.
ईडी ने इससे पहलें चिदंबरम को 30 मई को उसके समक्ष पेश होने को कहा था. चिदंबरम ने उसी दिन अदालत का दरवाजा खटाखटाया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चिदंबरम ने ईडी द्वारा जारी समन का अनुपालन करने का वादा किया है.