पाकिस्तान के साथ महत्वपूर्ण सामरिक वार्ता शुरू करने से पहले ओबामा प्रशासन ने बुधवार को इस्लामाबाद की भारत के साथ शांति वार्ता बहाल करने में मदद तथा कश्मीर सहित अन्य मामलों में मध्यस्थता करने संबंधी अपील साफ शब्दों में ठुकरा दी.
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि रिचर्ड होलब्रुक ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत और पाकिस्तान को अपने विवादित द्विपक्षीय मुद्दे खुद ही हल करने चाहिए और जब तक दोनों देश न चाहें, ओबामा प्रशासन को इसमें अपने लिए कोई भूमिका नजर नहीं आती. संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर भी थे.
पाकिस्तानी मीडिया द्वारा इस बारे में पूछे जा रहे सवालों का जवाब दे रहे होलब्रुक ने हालांकि कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान को सभी मुद्दों पर एक दूसरे से बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित करता है. उन्होंने कहा कि अमेरिका-पाक संबंधों के लिए दोनों देशों के बीच अब तक की पहली मंत्रिमंडल स्तरीय सामरिक वार्ता अत्यंत महत्वपूर्ण होगी.
पाकिस्तान नेशनल डे के अवसर पर पाकिस्तानी दूतावास में आयोजित एक भोज में, अमेरिका के दौरे पर गए विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि वह यहां अमेरिका के साथ आपसी विश्वास, आपसी हितों और साझे लक्ष्यों पर आधारित भागीदारी को विकसित करने आए हैं.
कुरैशी ने कहा ‘हमने पाकिस्तान में प्रगति की है और दुनिया हमारा बलिदान जानती है. हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं. आइये, हम अपनी भागीदारी को आगे बढ़ाएं.’ इस भोज समारोह में ओबामा प्रशासन के शीर्ष अधिकारी, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (सेवानिवृत्त) जेम्स जोन्स, सांसद और इस्लामाबाद में अमेरिकी राजदूत एनी पैटर्सन भी मौजूद थे.
रक्षा मंत्री अहमद मुख्तार, सेना प्रमुख अशफाक परवेज कयानी और वित्तीय सलाहकार अब्दुल हफीज शेख ने भी समारोह में भाग लिया. इससे पूर्व, सार्वजनिक मामलों के सहायक विदेश मंत्री पी जे क्राउले ने कहा कि ओबामा प्रशासन ने सभी देशों को समझाने की भरपूर कोशिश की कि क्षेत्र में अमेरिका के अन्य देशों के साथ संबंधों में सुधार सभी के हित में होगा.