पूर्व कैबिनेट मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड के लिए ट्रिपल तलाक पर दलील देते हुए शुक्रवार को कहा कि कुरान में ट्रिपल तलाक की प्रक्रिया साफ-साफ लिखी हुई है. एक साथ तीन तलाक बोलना इस्लाम के किसी भी स्कूल में मान्य नहीं है. ये प्री-इस्लामिक प्रैक्टिस प्रथा है.
उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक औरतों को जमीन में दफनाने में जैसा है. ट्रिपल तलाक इस्लाम का मूल तत्व नहीं है. कोई भी कानून जो अमानवीय हो, इस्लामिक नहीं हो सकता.
आरिफ मोहम्मद खान पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे हैं और कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है. शाह बानो केस में कांग्रेस सरकार के साथ मतभेद होने के चलते उन्होंने 1986 में कांग्रेस छोड़ दी. खान 1980 से ट्रिपल तलाक के खिलाफ लगातार बोलते रहे हैं.
इस्लाम में समस्याओं की जड़ काजी/मौलवी
दूसरी ओर मामले में याचिकाकर्ता फरहा फैज ने ट्रिपल तलाक की मुखालफत करते हुए दलील दी कि इस्लाम में सारी समस्याओं की जड़ मौलवी और काजी हैं, जो कुरान को तोड़ मरोड़कर अपने फायदे के हिसाब से समझाते हैं. ये समानातंर कोर्ट चलाते हैं.
उन्होंने कहा कि कुरान में ट्रिपल तलाक की व्यवस्था साफ़ साफ लिखी हुई है. इसके अलावा किसी भी तरह से दिया गया तलाक गैर इस्लामी है. फरहा ने कहा कि मुस्लिम लॉ के कोडिफिकेशन की जरूरत है.
तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को भी सुनवाई जारी रहेगी. केंद्र सरकार सोमवार को बहस की शुरुआत करेगी.
महिला जज न होने पर NCW ने उठाया सवाल
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम ने तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में किसी भी महिला जज को शामिल नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया है.
उन्होंने कहा, 'तीन तलाक की सुनवाई करने वाली पीठ से संबंधित चर्चा देख रही हूं. विभिन्न धर्मों के जजों को शामिल किए जाने की बात पर विचार करते हुए ये चीज मुझे परेशान कर रही है कि मुद्दे का वास्ता धर्म से नहीं बल्कि महिला अधिकारों और मानवाधिकारों के साथ बच्चों से है. पीठ में एक महिला जज को शामिल किया जाना चाहिए था.'
कुमारमंगलम ने कहा, 'यद्यपि मैं किसी भी जज की क्षमता पर सवाल नहीं उठा रही हूं. फिर भी पीठ में जज आर. भानुमति को शामिल किया जाना चाहिए था.'