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सेना, आईबी के कर्मियों को कनाडाई वीजा नहीं मिलना अस्वीकार्य: भारत

भारतीय सैन्य और खुफिया एजेंसियों के कई सेवारत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को कनाडा के वीजा नहीं देने को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ करार देते हुए विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने गुरुवार को कहा कि इस स्थिति पर कनाडा ‘उपयुक्त’ तरीके से ध्यान दें.

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भारतीय सैन्य और खुफिया एजेंसियों के कई सेवारत तथा सेवानिवृत्त कर्मियों को कनाडा के वीजा नहीं देने को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ करार देते हुए विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने गुरुवार को कहा कि इस स्थिति पर कनाडा ‘उपयुक्त’ तरीके से ध्यान दें.

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कृष्णा ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमने कनाडा सरकार को यह बता दिया है कि कनाडाई वीजा के लिये आवेदन करने वाले हमारे सुरक्षा बलों और एजेंसियों के सेवानिवृत्ति या सेवारत अधिकारियों को कनाडा उच्चायोग की ओर से जारी पत्र पूरी तरह से अस्वीकार्य है.’ उन्होंने कहा, ‘भारत एक लोकतंत्र है. चूंकि यहां संस्थान भारत के संविधान के तहत काम करते हैं, लिहाजा हमें हमारे सुरक्षा बलों और एजेंसियों तथा उनके द्वारा राष्ट्र को दी जाने वाली सेवाओं पर गर्व है.’

कृष्णा ने साफ कर दिया कि भारत त्वरित कार्रवाई चाहता है. उन्होंने कहा, ‘हम अपेक्षा करते हैं कि कनाडाई प्रशासन स्थिति पर उपयुक्त तरीके से ध्यान दे.’ दिल्ली स्थित कनाडाई उच्चायोग पिछले कुछ वर्ष से सशस्त्र बलों तथा खुफिया प्रतिष्ठानों के कई वरिष्ठ सेवारत तथा सेवानिवृत्त अधिकारियों को वीजा देने से इनकार कर रहा है. वीजा नहीं देने के पीछे कनाडा यह दावा करता है कि अधिकारी अथवा उनके संगठन जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं और हिंसा तथा मानवाधिकार हनन में लिप्त रहते हैं.

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गृह सचिव जी. के. पिल्लई ने विदेश सचिव निरुपमा राव को कठोर शब्दों में पत्र लिखकर इस बात पर जोर दिया कि विदेश मंत्रालय कड़े कदम उठाये तथा उच्चायोग को माफी मांगने और उन अधिकारियों को वापस बुलाने को कहे जिन्होंने सुरक्षा बलों के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की हैं. यह पूछने पर कि भारत अगला कौन सा कदम उठाने पर विचार कर रहा है, कृष्णा ने कहा, ‘कनाडाई प्रशासन के समस्या पर ध्यान दिये जाने तक इंतजार करें.’

उन्होंने कहा, ‘कनाडाई उच्चायुक्त को दो बार विदेश मंत्रालय के सचिवों ने तलब किया है.’ कृष्णा ने मीडिया से भी अपील की कि मुद्दे को अत्यधिक प्रचारित नहीं करें. हमने कनाडाई प्रशासन के समक्ष हमारी स्थिति स्पष्ट कर दी है. उन्होंने लश्कर ए तैयबा के संस्थापक तथा 26/11 मुंबई हमलों के मुख्य षड्यंत्रकारी हाफिज सईद को नजरबंदी से रिहा करने के फैसले को पाकिस्तानी उच्चतम न्यायालय द्वारा बरकरार रखने के बारे में पूछे गये सवाल का जवाब नहीं दिया. कृष्णा ने कहा, ‘मैंने पूरी रिपोर्ट नहीं देखी है. रिपोर्ट पर गौर करने के बाद ही मैं कोई टिप्पणी करने की स्थिति में रहूंगा.’

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