सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि कलात्मक स्वतंत्रता का इस्तेमाल महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस जैसी ऐतिहासिक हस्तियों को गाली देने के लिए नहीं किया जा सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐतिहासिक महापुरुषों पर व्यंग्य, आलोचना और पैरोडी बनाना गलता नहीं है, लेकिन इसके लिए आपत्तिजनक या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना गलत है. इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में शामिल नहीं किया जा सकता. विचारों की आजादी और शब्दों की आजादी के अंतर को समझना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी दृष्टिकोण को पेश करते समय सनसनी पैदा करने के लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करना गलत है.
ये था मामला
महात्मा गांधी पर मराठी कवि वसंत दत्तात्रेय गुर्जर द्वारा लिखित कविता 1994 में प्रकाशित करने के आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये बात कही. प्रकाशक पर कथित रूप से अश्लील और अशिष्ट कविता प्रकाशित करने का आरोप है. कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया है.